हमज़ा बुरहान: मुज़फ़्फ़राबाद में मारे गए ‘कॉलेज प्रिंसिपल’ का पुलवामा से क्या है नाता?

हमज़ा बुरहान: मुज़फ़्फ़राबाद में मारे गए ‘कॉलेज प्रिंसिपल’ का पुलवामा से क्या है नाता?

हमज़ा बुरहान

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पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में पुलिस के अनुसार, गोजरा क्षेत्र के एक निजी कॉलेज के प्रिंसिपल हमज़ा बुरहान की गुरुवार दोपहर की गोली मारकर हत्या कर दी गई..

डीएसपी इश्तियाक गिलानी ने बीबीसी को बताया कि एक प्राइवेट कॉलेज के प्रिंसिपल हमज़ा बुरहान हमले में घायल हुए थे और सीएमएच में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

पुलिस के अनुसार, हमज़ा पर ये हमला उनके कॉलेज के सामने हुआ.

इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब्दुल्ला कमाल नाम के एक शख़्स को गिरफ़्तार कर लिया है.

गुरुवार को हमज़ा बुरहान के गंभीर रूप से घायल होने की ख़बरों के बाद जब बीबीसी ने पुलिस से संपर्क किया, तो डीएसपी इश्तियाक गिलानी ने पुष्टि की कि हमज़ा बुरहान मुज़फ़्फ़राबाद का निवासी है और भारतीय प्रशासित कश्मीर से पलायन कर आया था.

कॉलेज के बाहर गोली लगने से घायल होने के बाद हमज़ा बुरहान की अस्पताल में मौत हो गई.

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इमेज कैप्शन, कॉलेज के बाहर गोली लगने से घायल होने के बाद हमज़ा बुरहान की अस्पताल में मौत हो गई.

डीएसपी इश्तियाक गिलानी ने बताया कि हमले के तुरंत बाद हमज़ा बुरहान को अस्पताल ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

इश्तियाक गिलानी ने कहा कि हमज़ा बुरहान पर हमले के बाद पाकिस्तानी पंजाब के वाह कैंट में रहने वाले एक कथित हमलावर को भी हिरासत में लिया गया है. प्रारंभिक जांच से पता चला है कि वह रविवार को कैंट से मुज़फ़्फ़राबाद आया था और एक स्थानीय होटल में ठहरा था.

पुलिस के अनुसार, “हमज़ा अपने कुछ दोस्तों के साथ कॉलेज से बाहर आए थे और बातचीत के बाद जब वह वापस कॉलेज के अंदर जा रहे थे, तो पहले उनकी पीठ में गोली मारी गई, जिसके बाद और गोलियां चलाई गईं. इनमें से एक गोली उनके सिर में लगी.”

गौरतलब है कि हमज़ा बुरहान अहमद मुज़फ़्फ़राबाद के जिस निजी कॉलेज में प्रिंसिपल थे, उन पर हमले के बाद, उस कॉलेज के छात्रों ने भी विरोध प्रदर्शन भी किया था.

भारतीय मीडिया में कैसी चर्चा?

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में घटी इस घटना को भारतीय मीडिया में काफी कवरेज मिल रही है. कई भारतीय मीडिया संस्थानों ने दावा किया गया कि हमज़ा बुरहान वास्तव में अर्जुमंद गुलज़ार डार थे, जिन्हें कुछ साल पहले भारत सरकार ने ‘आतंकवादी’ घोषित किया था.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी उर्दू को पुष्टि की कि हमज़ा बुरहान भारतीय प्रशासित कश्मीर से थे और कुछ साल पहले पाकिस्तान आए थे.

हमला कब और कैसे हुआ?

इस कॉलेज की स्थापना करीब दस साल पहले हुई थी.

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इमेज कैप्शन, मुज़फ़्फ़राबाद के इस कॉलेज की स्थापना करीब दस साल पहले हुई थी

मुज़फ़्फ़राबाद के पुलिस अधीक्षक रियाज़ मुग़ल ने बीबीसी को बताया कि हमज़ा बुरहान पर हुए हमले के संबंध में एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है, लेकिन उन्होंने इससे अधिक कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया.

सदर पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें दोपहर 12:10 पर सूचना मिली कि गोजरा बाईपास पर स्थित एक निजी कॉलेज के प्रिंसिपल को गोली मार दी गई है.

कॉलेज के एक सुरक्षा गार्ड ने बीबीसी को बताया कि गुरुवार दोपहर को प्रिंसिपल हमज़ा बुरहान ने उनसे कहा कि ‘मेरे कुछ मेहमान आ रहे हैं,’ जिसके बाद वह खु़द उनका स्वागत करने के लिए कॉलेज मुख्य दरवाज़े पर गए.

सुरक्षा गार्ड के अनुसार, वह अंदर थे जब अचानक गोलियों की आवाज़ सुनी, और जब वह बाहर आए तो उन्होंने प्रिंसिपल को घायल अवस्था में पड़ा देखा.

बीबीसी से बात करते हुए मुज़फ़्फ़राबाद के डिप्टी कमिश्नर मुनीर कुरैशी ने दावा किया कि हमज़ा बुरहान पर हमला एक टार्गेट किलिंग थी.

चश्मदीदों के अनुसार, हमज़ा बुरहान पर हमले के तुरंत बाद यातायात अचानक रुक गया और घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई. गुरुवार शाम को कुछ कॉलेज छात्रों ने भी इस घटना के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन किया.

ये कॉलेज गोजरा बाईपास रोड पर स्थित है. यह सड़क पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद की ओर जाती है. यह इलाका शहर का घनी आबादी वाला हिस्सा है, जहाँ हमेशा भीड़भाड़ रहती है, साथ ही कई स्कूल भी इसी क्षेत्र में स्थित हैं.

कॉलेज पिछले दस सालों से चलाया जा रहा है और प्रशासन के अनुसार, यहाँ 100 से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं.

हमज़ा बुरहान कौन है?

हमज़ा बुरहान

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इमेज कैप्शन, हमज़ा बुरहान की एक पुरानी तस्वीर

मुज़फ़्फ़राबाद के डिप्टी कमिश्नर मुनीर कुरैशी कहते हैं, “इस मामले में अभी भी जांच चल रही है. इसे भारतीय मीडिया ने सबसे ज़्यादा प्रमुखता दी है. मुझे लगता है कि उन्होंने घटना घटने के पांच-दस मिनट बाद ही ख़बर फैलानी शुरू कर दी थी. उन्होंने यह प्रचार किया कि वह पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड था.”

मुनीर कुरैशी के अनुसार, “अब हमारी पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियां ​​इस बात की जांच कर रही हैं कि हमज़ा बुरहान कौन था.”

हालांकि, मुज़फ़्फ़राबाद के दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बीबीसी को पुष्टि की कि हमज़ा बुरहान का नाता भारत प्रशासित कश्मीर से था.

जब मुज़फ़्फ़राबाद के पुलिस अधिकारी एसपी रियाज मुग़ल से पूछा गया कि क्या हमज़ा बुरहान भारतीय प्रशासित कश्मीर से था, तो उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा, “वह कश्मीरी था.”

रियाज़ मुग़ल से हमज़ा बुरहान के चरमपंथी संगठन से कथित संबंधों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “इस संबंध में अभी कुछ भी पता नहीं चला है, जांच जारी है.”

हमज़ा कब पाकिस्तान आया

14 फरवरी, 2019 को श्रीनगर, भारत में जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर लेथपोरा में क्षतिग्रस्त वाहनों के पास सुरक्षा बल

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इमेज कैप्शन, 14 फ़रवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में विस्फोटकों से भरी गाड़ी केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल की बस से भिड़ गई थी. इस हमले में 40 सीआरपीएफ़ जवान मारे गए थे.

अर्जुमंद गुलज़ार डार उर्फ़ ​​हमज़ा बुरहान उर्फ़ ​​डॉक्टर के भाई आरिफ़ गुलज़ार डार दिल्ली में रहते हैं. उन्होंने बीबीसी उर्दू के रियाज़ मसरूर को बताया कि “मुझे भी पुलिस एसएसपी का फोन आया था. हमें अभी तक पता नहीं चला है कि क्या हुआ है. मैं इससे ज़्यादा कुछ नहीं कह सकता.”

वहीं, कश्मीर में रह रहे अर्जुमंद गुलज़ार डार के पिता ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

हालांकि, इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि भारत के गृह मंत्रालय ने अप्रैल 2022 में अर्जुमंद गुलज़ार डार उर्फ़ ​​हमज़ा बुरहान उर्फ़ ​​डॉक्टर को ‘आतंकवादी’ घोषित किया था.

भारत के गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, “अर्जुमंद गुलज़ार डार उर्फ़ ​​हमज़ा बुरहान उर्फ़ ​​डॉक्टर को 19 अप्रैल, 2022 को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत चौथी अनुसूची में आधिकारिक तौर पर सूचीबद्ध किया गया था, जिसमें उसे ‘आतंकवादी’ घोषित किया गया था.”

गृह मंत्रालय के अनुसार, यूएपीए केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि अगर उसे विश्वास है कि कोई व्यक्ति ‘आतंकवाद’ में शामिल है, तो वह उसका नाम अधिनियम की चौथी अनुसूची में शामिल कर सकती है.

अर्जुमंद गुलज़ार डार उर्फ़़ ​​हमज़ा बुरहान के बारे में विस्तृत जानकारी गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई गई है.

इसके अनुसार, “अर्जुमंद गुलज़ा डार उर्फ़़ ​​हमज़ा बुरहान उर्फ़़ ​​डॉक्टर, उम्र 23 वर्ष (वर्तमान उम्र 27 वर्ष), का जन्म 1999 में हुआ था और वह खरबतपुरा (पुलवामा) का निवासी है और वह आतंकवादी संगठन ‘अल-बद्र’ का सहयोगी सदस्य है.”

गृह मंत्रालय के अनुसार, आधिकारिक दस्तावेजों में उनके पिता का नाम गुलज़ार अहमद डार के रूप में दर्ज है. मंत्रालय ने अल-बद्र को “आतंकवादी संगठन” के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.

गृह मंत्रालय का आरोप है कि “अर्जुमंद गुलज़ार डार वैध दस्तावेजों पर पाकिस्तान गया, जहां वह आतंकवादी संगठन अल-बद्र में शामिल हो गया और तब से वह इस संगठन का सक्रिय सदस्य और कमांडर रहा है और वर्तमान में पाकिस्तान से ही काम कर रहा है.”

गृह मंत्रालय के अनुसार, “पाकिस्तान की अपनी यात्रा के बाद से, अर्जुमंद गुलज़ार डार युवाओं को इस संगठन में शामिल होने के लिए उकसा रहा है और अल-बद्र की आतंकवादी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता भी मुहैया कर रहा है.”

गृह मंत्रालय ने आगे आरोप लगाया कि “अर्जुमंद गुलज़ार डार पुलवामा में विस्फोटक बरामदगी, 18 नवंबर, 2020 को पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कर्मियों पर हुए ग्रेनेड हमले और युवाओं को आतंकवादी संगठन अल-बद्र में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने में संलिप्त रहा है.”

गृह मंत्रालय की अधिसूचना में आगे कहा गया है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर, “केंद्र सरकार को विश्वास है कि अर्जुमंद गुलज़ार डार उर्फ़़ ​​हमज़ा बुरहान उर्फ़ ​​डॉक्टर आतंकवाद में शामिल है, इसलिए उसे यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया जाता है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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