प्रदेश के साथ ही इंदौर में स्वामित्व योजना के तहत आबादी भूमि पर रहने वाले ग्रामीण परिवारों को कानूनी संपत्ति स्वामी बनाने के लिए स्वामित्व अधिकार पत्र…और पढ़ें

HighLights
- अधिकार पत्रों और कम्प्यूटरीकृत खसरों में संपत्ति धारकों की अधूरी जानकारी दर्ज है
- कहीं पर सिर्फ धारकों का नाम ही लिखा गया है औ पिता, पति के नाम के अलावा सरनेम और पता भी दर्ज नहीं है
- ऐसे में सही व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल है, अन्य विसंगतियां भी हैं
प्रेम जाट, नईदुनिया, इंदौर। प्रदेश के साथ ही इंदौर में स्वामित्व योजना के तहत आबादी भूमि पर रहने वाले ग्रामीण परिवारों को कानूनी संपत्ति स्वामी बनाने के लिए स्वामित्व अधिकार पत्र दिए जा रहे है। अधिकार पत्रों और कम्प्यूटरीकृत खसरों में संपत्ति धारकों की अधूरी जानकारी दर्ज है। कही पर सिर्फ धारकों का नाम ही लिखा गया है औ पिता, पति के नाम के अलावा सरनेम और पता भी दर्ज नहीं है। ऐसे में सही व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल है। अन्य विसंगतियां भी है। इनका ग्राउड टुथिंग या दावे आपत्ति के समय सुधार नहीं किया गया। ऐसे में अब होने वाली रजिस्ट्री में परेशानी सामने आ सकती है।
स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे के बाद जारी किए गए अधिकार पत्रों और कम्प्यूटरीकृत खसरों में संपत्ति धारकों की अधूरी जानकारी दर्ज होने का मामला सामने आया है। इंदौर जिले में 522 गांवों में सर्वे होना है और 541 में सर्वे का कार्य पूरा हो चुका, जबकि 11 में प्रक्रिया जारी है। ऐसे में कम्प्यूटरीकृत खसरों में कई संपत्ति धारकों की अधूरी जानकारी दर्ज हैै।
कई गांवों में ऐसी गडबड़िया सामने आई है।गौरतलब है कि सरकार ने स्वामित्व योजना के भूमिस्वामियों को संपत्ति का कानूनी अधिकार देने के लिए रजिस्ट्री कराने का निर्णय लिया है।यह रजिस्ट्रियां सरकार द्वारा निशुल्क कराई जाएगी।इसके लिए तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को उप पंजीयन के अधिकार दिए गए है। संभावना है कि अगस्त से रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू होगी।
समग्र से लिया संपत्ति धारक का डाटा
स्वामित्व योजना में सर्वे के दौरान समग्र से संपत्ति धारक का डाटा उठाकर नाम दर्ज हुए है। इसके बाद दावे-आपत्ति की प्रक्रिया भी हुई, लेकिन नाम सुधार नहीं कराया गया। कई स्थानों पर अलग-अलग संपत्ति को एक बनाकर दिया गया है। तो कही पर एक ही सदस्य का नाम दर्ज है , जबकि हिस्सा दो भाईयों का है। शहर में रहने वाले परिवार का नाम नहीं जोड़ा गया।
संपत्ति विवाद और कानूनी उलझन होगी
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी का कहना है कि अधिकार पत्र में अधूरी जानकारी दर्ज होने से भविष्य में यह दस्तावेज फर्जीवाड़े, संपत्ति विवाद आैर कानूनी उलझनों का कारण बन सकता हैं। ड्रोन सर्वे और ग्रांउड टुथिंग जैसी आधुनिक तकनीक के उपयोग के बावजूद रिकार्ड तैयार करते समय इतनी बड़ी चूक की गई।स्वामित्व योजना के तैयार किए गए रिकार्ड का पुन: सत्यापन कर गलत जानकारी को सुधारा जाना चाहिए।
रजिस्ट्री के समय आएगी परेशानी
सरकार ने आबादी भूमि पर रहने वाले परिवारों को स्वामित्व अधिकार पत्र के माध्यम से रजिस्ट्री कराने की तैयारी की है, जबकि कई पत्रों में संपत्ति स्वामी का पूरा नाम दर्ज नहीं है। रजिस्ट्री के दौरान वह अपनी पहचान कैसे स्थापित करेगा। सिर्फ नाम होने से आधार और अन्य दस्तावेज से उसकी जांच नहीं हो सकेगी। गलत व्यक्ति भी मौजूद रहकर दस्तावेज पंजीकृत करावा सकता है।
गांव एक, लेकिन अनिता दो
बिचोली हप्पसी तहसील के ग्राम तिल्लौर खुर्द में अधिकार पत्र में दो अनिता नाम दर्ज है और इनके नाम के साथ पति, पिता या सरनेम दर्ज नहीं है। एक अनिता की ब्लाक संख्या 378 बी आैर प्लाट संख्या 463-पी है, तो दूसरे की ब्लाक संख्या 501 बी और प्लाट संख्या 1388-पी दर्ज है।ऐसे ही खसरों में दो शोरमबाई दर्ज है।रजिस्ट्री के दाैरान इनकी पहचान करना मुश्किल होगा कि कौनसी सही दावेदार है।
- कई संपत्ति धारकों के पिता-पति के नाम, पता और सरनेम दर्ज नहीं है।
- दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री कराई जाएगी, पहचान कैसे होगी।
- सही नाम नहीं होने से गलत व्यक्ति द्वारा रजिस्ट्री कराने की समस्या।
- इंदौर जिले में 522 गांवों में सर्वे होना है
- 541 में सर्वे का कार्य पूरा, 11 में प्रक्रिया जारी है।
भू-अभिलेख में सुधार का प्राविधान है
स्वामित्व अधिकार पत्र में यदि किसी तरह की त्रुटि है, तो इसका सुधार कराया जा सकता है। भू-अभिलेख में सुधार का प्राविधान है। संपत्ति धारक तय प्रक्रिया के तहत सुधार करवा सकते है। – शिवम वर्मा, कलेक्टर
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