इंदौर लाइट हाउस प्रोजेक्ट में निर्माण संबंधी खामियां, स्टेटस रिपोर्ट पेश न करने पर हाई कोर्ट नाराज, निगमायुक्त 14 जुलाई को तलब

इंदौर लाइट हाउस प्रोजेक्ट में निर्माण संबंधी खामियां, स्टेटस रिपोर्ट पेश न करने पर हाई कोर्ट नाराज, निगमायुक्त 14 जुलाई को तलब

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने लाइट हाउस प्रोजेक्ट में निर्माण संबंधी खामियों को लेकर नगर निगम की लापरवाही पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। गुलमर्ग कॉम्प्लेक्स-2 में सीपेज और लीकेज की शिकायतों से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान नगर निगम द्वारा स्टेटस रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई है। डिवीजन बेंच ने निगमायुक्त को 14 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।

निगमायुक्त की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य

शुक्रवार को हुई सुनवाई में अदालत को बताया गया कि पूर्व आदेश के बावजूद नगर निगम ने स्थिति रिपोर्ट दाखिल नहीं की। इसे गंभीर मानते हुए कोर्ट ने निगमायुक्त की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य कर दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परियोजना का उद्घाटन किया था

यह मामला गुलमर्ग कॉम्प्लेक्स-2 के 1040 फ्लैटों से जुड़ा है। इनका निर्माण केंद्र सरकार के लाइट हाउस प्रोजेक्ट के तहत प्री-फेब्रिकेटेड सैंडविच तकनीक से किया गया था। वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस परियोजना का उद्घाटन किया था।

रहवासी नरेंद्र गोस्वामी द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि भवन निर्माण में गंभीर खामियां हैं। फ्लैटों में पाइपलाइन लीकेज, दीवारों में सीपेज, कमरों में गंदा पानी भरने और नमी के कारण बिजली की लाइनों में शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं होने पर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अनुराग जैन ने बताया कि हाई कोर्ट पहले ही केंद्र सरकार, राज्य सरकार, इंदौर नगर निगम और निर्माण एजेंसी मेसर्स केपीआर प्रोजेक्ट्स कॉन प्रा. लि. को नोटिस जारी कर जवाब मांग चुका है।

नगर निगम ने कोर्ट को बताया था कि 12 अप्रैल 2024 को निर्माण एजेंसी को पत्र लिखकर दीवारों में दरार, शौचालयों में सीपेज, पाइपलाइन लीकेज, फर्श की ढलान, सर्विस डक्ट और अन्य निर्माण संबंधी खामियों को दूर करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही दुर्घटना की स्थिति में निर्माण एजेंसी को जिम्मेदार ठहराने की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बावजूद समस्याएं बरकरार हैं।

निराकरण और पूरी स्थिति की स्टेटस रिपोर्ट मांगी

इसी के बाद हाई कोर्ट ने शिकायतों के निराकरण और पूरी स्थिति की स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। शुक्रवार को रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं होने पर कोर्ट ने निगमायुक्त को तलब किया है। अब उन्हें अदालत को बताना होगा कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ और रहवासियों की समस्याओं के समाधान के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

लाइट हाउस प्रोजेक्ट : एक नजर

128 करोड़ रुपये की लागत से 1040 फ्लैटों का निर्माण।

निर्माण एजेंसी केपीआर प्रोजेक्ट्स कॉन प्रा. लि.।

फ्लैटों में लीकेज, सीपेज और दीवारों में दरार की शिकायतें।

निर्माण एजेंसी पर पांच वर्ष तक रखरखाव की जिम्मेदारी।

प्रत्येक वन बीएचके फ्लैट की कीमत करीब 12 लाख रुपये, जिसमें हितग्राहियों को छह-छह लाख रुपये का अनुदान मिला।

20 जून को केंद्रीय टीम ने परियोजना का निरीक्षण किया था।

जिम्मेदारों का क्या कहना है

प्रधानमंत्री आवास योजना के जिन आवासों में लीकेज और सीपेज की समस्या सामने आई है, वहां निर्माण एजेंसी के माध्यम से सुधार कार्य कराया जा रहा है।

– अभिवन राय, उपयंत्री, प्रधानमंत्री आवास योजना

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