बदलेगा पढ़ाई का तरीका, आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर शिक्षा सुधार की पहल, इंदौर में शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग

बदलेगा पढ़ाई का तरीका, आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर शिक्षा सुधार की पहल, इंदौर में शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग

जिला प्रशासन द्वारा जिले के कक्षा तीसरी से आठवीं तक के स्कूलों में शिक्षा सुधार की पहल शुरू की जा रही है।आईआईटी मद्रास द्वारा शिक्षकों के लिए बेहतर शि…और पढ़ें

Publish Date: Tue, 14 Jul 2026 09:15:03 AM (IST)Updated Date: Tue, 14 Jul 2026 09:15:03 AM (IST)

बदलेगा पढ़ाई का तरीका, आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर शिक्षा सुधार की पहल, इंदौर में शिक्षकों को मिलेगी ट्रेनिंग
स्कूलों में बदलेगा पढ़ाई का तरीका। (एआई इमेज)

HighLights

  1. इंदौर में प्रशासन की कक्षा तीन से आठ तक सुधार की कवायद
  2. आईआईटी मद्रास के सहयोग से शिक्षा सुधार का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है
  3. इसका उद्देश्य बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाना, शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों से प्रशिक्षित करना है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जिले के सरकारी स्कूलों में अब केवल भवन और सुविधाएं ही नहीं, बल्कि पढ़ाने और सीखने का तरीका भी बदलेगा।

कलेक्टर शिवम वर्मा की पहल पर कक्षा तीसरी से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए आईआईटी मद्रास के सहयोग से शिक्षा सुधार का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाना, शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों से प्रशिक्षित करना और परीक्षा परिणामों में सुधार लाना है।

शिक्षकों के लिए बेहतर शिक्षण मॉडल लागू तैयार किया जाएगा

जिला प्रशासन द्वारा जिले के कक्षा तीसरी से आठवीं तक के स्कूलों में शिक्षा सुधार की पहल शुरू की जा रही है।आईआईटी मद्रास द्वारा शिक्षकों के लिए बेहतर शिक्षण मॉडल लागू तैयार किया जाएगा। इस परियोजना के तहत पारंपरिक पढ़ाई के बजाय बच्चों की समझ, भागीदारी और व्यवहारिक सीख पर आधारित नई शिक्षण पद्धति अपनाई जाएगी। सप्लीमेंट्री लर्निंग माडल के जरिए विद्यार्थियों को विषयों को आसान और रोचक तरीके से समझाया जाएगा।

जल्द ही जिले के चयनित स्कूलों के शिक्षकों का प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा

साथ ही शिक्षकों को भी ऐसी तकनीकें सिखाई जाएगी, जिनसे वे कम समय में अधिक प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि फिलहाल इस योजना पर पायलट स्तर पर काम चल रहा है। जल्द ही जिले के चयनित स्कूलों के शिक्षकों का प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद शिक्षक वैज्ञानिक और गतिविधि आधारित तरीके से बच्चों को पढ़ाएंगे, जिससे विद्यार्थियों की विषयों पर पकड़ मजबूत होगी और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।

कक्षा संचालन में मिलेगी सुविधा

प्रशासन का मानना है कि नई शिक्षण प्रणाली से बच्चों के लिए पढ़ाई आसान और रुचिकर बनेगी, वहीं शिक्षकों को भी कक्षा संचालन में सुविधा मिलेगी। यदि पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम सकारात्मक रहे, तो इसे जिले के अन्य सरकारी स्कूलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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