
विभागीय जानकारों का कहना है कि पंजीकरण अधिनियम 1908 की धारा 34 जो पंजीकरण से पहले जांच और निष्पादन की प्रक्रिया को परिभाषित करती है, उसके अनुसार यह रजिस्ट्री विधि विरुद्ध है। इसकी उपधारा (1) में स्पष्ट कहा गया है कि किसी भी दस्तावेज़ को इस अधिनियम के तहत तब तक पंजीकृत नहीं किया जाएगा जब तक कि उस दस्तावेज को निष्पादित करने वाले व्यक्ति या उनके प्रतिनिधि, असाइनी या एजेंट धारा 23, 24, 25 और 26 के तहत प्रस्तुतीकरण के लिए अनुमत समय के भीतर पंजीकरण अधिकारी के सामने उपस्थित न हों। लेकिन नागौद में जब पंजीकरण अधिकारी उप पंजीयक मौजूद ही नहीं है तो कैसे रजिस्ट्री हो रही है।
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