जन्म का होना ही मृत्यु का निमंत्रण है, यह शाश्वत सत्य पंडित अमियो रंजन बंद्योपाध्याय ने बहुत पहले अपने अंतस में आत्मसात कर लिया था। शायद इसी गहरी स्वीकृति के कारण इस वर्ष फरवरी में अपना सौवां जन्मदिन उन्होंने किसी औपचारिक समारोह से नहीं, बल्कि एक जीवंत संगीत संध्या के रूप में मनाया।
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