उम्र की सारी थकान भूल, फिर बच्चों सा खिलखिलाये बुजुर्ग, किसी ने सुनाए चुटकुले किसी ने की मिमिक्री

इंदौर। उम्र के साथ जिंदगी की रफ्तार भले थोड़ी धीमी हो जाए, लेकिन दिल में खुशियाँ मनाने की चाह कभी कम नहीं होती। कभी दोस्तों के साथ बैठकर पुरानी बातें याद करना, कभी किसी गीत पर झूमना, तो कभी छोटी-सी जीत पर बच्चे की तरह खुश हो जाना, ऐसे ही पल जिंदगी को खास बनाते हैं।

आनंदम परिवार की बहुप्रतीक्षित वार्षिक पिकनिक में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहाँ वरिष्ठ सदस्यों ने एक दिन के लिए रोजमर्रा की चिंताओं को पीछे छोड़कर खूब मस्ती की, हँसे, गाए और अपनेपन के साथ यादगार पल बिताए।

रविवार को बारिश की फुहारों से सजे खुशनुमा रविवार को आनंदम परिवार की यह पिकनिक एक्रोपोलिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च के खूबसूरत परिसर में आयोजित हुई। बस से पहुँचे सदस्यों का चंदन टीके, पीले दुपट्टे और गुलाब की पंखुड़ियों से भावभीना स्वागत किया गया।

इसके बाद सभी ने इंदौरी पोहा, जलेबी और कचौड़ी का स्वाद लिया और गुरवीन कौर भाटिया के सहयोग से पौधारोपण कर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाई।

कार्यक्रम की शुरुआत में आनंदम के सचिव एस.बी. खंडेलवाल ने स्वागत किया, जबकि अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने ऐसे आयोजनों को वरिष्ठ सदस्यों के स्वास्थ्य, खुशी और आपसी जुड़ाव के लिए महत्वपूर्ण बताया।

इस अवसर पर एक्रोपोलिस के चेयरमैन ए.के. सोजतिया और डायरेक्टर डॉ. एस.सी. शर्मा का स्वागत किया गया। उन्होंने आनंदम परिवार की मेजबानी पर खुशी जताई और बेटियों की शिक्षा के लिए आनंदम के प्रयासों की सराहना की।

इसके बाद शुरू हुआ मनोरंजन का ऐसा सिलसिला, जिसमें हर किसी के भीतर छिपा कलाकार खुलकर सामने आया। शानदार कव्वाली ने खूब तालियां बटोरीं, वहीं नृत्य प्रस्तुति ने माहौल में और रंग भर दिया।

संगीत अंताक्षरी में दीवाने, मस्ताने और परवाने टीमों के बीच जोरदार मुकाबला हुआ। हंसी-मजाक से भरे चुटकुलों और मजेदार मिमिक्री ने सभी को खूब गुदगुदाया, तो सुरीले गीतों ने पूरे माहौल को संगीत से भर दिया।

इसके बाद सभी ने बारिश के मौसम के पसंदीदा मालवी दाल-बाफला भोज का भरपूर आनंद लिया। दोपहर बाद ग्रैंड तंबोला ने फिर उत्साह बढ़ाया और आकर्षक नकद पुरस्कारों ने खेल का रोमांच और बढ़ा दिया।

शाम की चाय के साथ दिन का समापन हुआ, लेकिन चेहरे पर खुशी और दिल में बिताए पलों की मिठास देर तक बनी रही। यह पिकनिक सिर्फ एक दिन की मौज-मस्ती नहीं, बल्कि उस खूबसूरत रिश्ते का उत्सव रही।

जहाँ उम्र से ज्यादा मायने रखता है साथ, अपनापन और जिंदगी को खुलकर जीने का जज़्बा। आनंदम परिवार ने एक बार फिर दिखा दिया कि दिल में उमंग हो और साथ अपनों का हो, तो जिंदगी का हर मौसम सुहाना हो जाता है।

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