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देवास पुलिस ने सूने मकानों को निशाना बनाने वाले एक शातिर चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने दो महिलाओं सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से सोने-चांदी के आभूषण, नकदी सहित करीब 12 लाख रुपये का चोरी का सामान और वारदात में इस्तेमाल की गई कार बरामद की गई है। मामले का खुलासा गुरुवार को पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद ने प्रेस वार्ता में किया। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह रेकी के दौरान महिलाओं को साथ रखता था ताकि किसी को उन पर शक न हो। बरामद सामान में डायमंड मंगलसूत्र, डायमंड ईयररिंग, घड़ियां, लैपटॉप और नकदी शामिल है। अलग-अलग इलकों में चोरी की वारदात को दिया था अंजाम
एसपी पुनीत गेहलोद ने बताया कि पहली चोरी 27 मई को सिविल लाइन थाना क्षेत्र में हुई थी। फरियादी आदेश कुमार अपने परिवार के साथ जबलपुर गए हुए थे। इसी दौरान अज्ञात चोरों ने उनके सूने मकान का ताला तोड़कर अलमारी के लॉकर से डायमंड मंगलसूत्र, डायमंड ईयररिंग, घड़ी और नकदी चोरी कर ली थी। दूसरी वारदात 31 मई को कर्मचारी कॉलोनी क्षेत्र में हुई। यहां भी परिवार ईद मनाने उज्जैन गया हुआ था। सूने मकान का फायदा उठाकर आरोपियों ने घर में घुसकर सोने-चांदी के आभूषण, नकदी, लैपटॉप सहित अन्य कीमती सामान चोरी कर लिया था। इस संबंध में कोतवाली थाने में प्रकरण दर्ज किया गया था। सीसीटीवी खंगाले तो आरोपियों की पहचान हुई
लगातार हो रही चोरी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जयवीर सिंह भदौरिया के मार्गदर्शन और नगर पुलिस अधीक्षक सुमित अग्रवाल के निर्देशन में थाना प्रभारी श्यामचंद शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने घटनास्थलों और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान आरोपियों को एक ही चार पहिया वाहन का उपयोग करते हुए देखा गया, जिससे गिरोह की पहचान हुई। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी जयंत मीणा (19 वर्ष), आकाश तथा दो महिला आरोपियों चेतना सोलंकी और चिंकी उर्फ प्रिया को हिरासत में लेकर पूछताछ की। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी जयंत मीणा के खिलाफ पहले से पांच आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, जबकि आरोपी आकाश पर करीब 15 अपराध दर्ज बताए गए हैं। चोरी एक ही वाहन का इस्तेमाल पूछताछ में आरोपियों ने दोनों चोरी की वारदातों को अंजाम देना स्वीकार कर लिया। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने पांच से छह दिनों के भीतर तीन चोरियां की थीं, जिनमें से फिलहाल दो चोरियों का खुलासा किया गया है। वारदातों में एक ही वाहन का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस ने महज सात दिनों के भीतर मामले का खुलासा करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उनकी निशानदेही पर चोरी गया पूरा मशरूका तथा घटना में प्रयुक्त वाहन बरामद कर लिया। महिलाओं की थी अहम भूमिका पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह जब रेकी करता था, तब उनके साथ महिलाएं कार में बैठती थीं। वारदात के दौरान भी महिलाओं को वाहन में साथ रखा जाता था ताकि किसी को शक न हो और पुलिस की नजर से बचा जा सके। इसी रणनीति के तहत गिरोह चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था। पुलिस अब आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि उनका अन्य जिलों में हुई चोरी की वारदातों से कोई संबंध है या नहीं।
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