देशभर में चर्चित रहे इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड की जांच रिपोर्ट कांड के आठ महीने बाद बंद लिफाफे में कोर्ट पहुंच चुकी है। अब अगली सुनवाई पर रिपोर्ट सार्वजनिक हो सकती है और यह पता चलेगा कि इस कांड का असली जिम्मेदार कौन है।
पांच सौ से ज्यादा पेजों की इस रिपोर्ट में घटना से जुड़े कामों के दस्तावेज, रहवासियों, जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के अलावा प्रभावित परिवारों के बयान भी लिए गए हैं। दूषित पानी से अब तक 36 मौतें हुई हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने कितनी मौतें दूषित पानी के सेवन से मानी हैं, इसका भी खुलासा रिपोर्ट में होगा। प्रभावित परिवारों को कितना मुआवजा दिया गया और उसका आधार क्या था, इसकी भी जानकारी सरकार से जुटाई गई।
भागीरथपुरा पेयजल कांड को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। हाईकोर्ट ने एक सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था। कमेटी ने इस घटना से जुड़े अफसरों के बयान भी लिए हैं। शुरुआती मौतों की वजह स्वास्थ्य विभाग दूषित पेयजल के कारण नहीं मान रहा था, लेकिन जब लगातार बस्ती से मरीज ज्यादा आने लगे और मौतों की संख्या बढ़ने लगी, तो अफसरों ने चुप्पी साध ली। बस्ती में जो भी मरीज बीमार थे, उन्हें निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
दो आईएएस हटे, आधा दर्जन अफसर निलंबित हुए
भागीरथपुरा का मुद्दा गरमाने के बाद इसकी गाज आईएएस अफसरों पर भी गिरी। तत्कालीन निगमायुक्त दिलीप यादव और अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया का तबादला इंदौर से कर दिया गया, जबकि नर्मदा प्रोजेक्ट के कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव सहित अन्य पांच अफसरों को निलंबित किया गया।
घटना को लेकर यह बात सामने आई थी कि भागीरथपुरा बस्ती में लाइन बदलने की फाइलें पहले से तैयार थीं, लेकिन उन्हें मंजूरी देने में देरी की गई। बस्ती में नवंबर माह से ही मरीज सामने आने लगे थे, लेकिन अफसरों ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। अब जांच रिपोर्ट में यह पता चलेगा कि इस घटना को लेकर सबसे ज्यादा लापरवाही किस स्तर पर हुई है। आपको बता दें कि इस कांड की गूंज दिल्ली तक थी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इंदौर आकर भागीरथपुरा में प्रभावित परिवारों से मिले थे।
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