![]()
साल 2024। वैज्ञानिकों की एक टीम सोशल मीडिया पर वीडियो स्क्रॉल कर रही थी कि अचानक टिकटॉक के एक शॉर्ट क्लिप ने उनकी नजरें अटका दीं। वीडियो भारत-नेपाल सीमा का था। एक बोरवेल से पानी बह रहा था और उसी धारा के साथ बाहर निकल आई एक बेहद अजीबोगरीब जीव। पतली, बिना रंग की और केंचुए जैसी बलखाती हुई, जिसकी आंखें नाममात्र की थीं। पहली नजर में वह कोई मामूली जलजीव लग सकती थी, लेकिन वैज्ञानिकों की आंखों ने ताड़ लिया कि यह प्रकृति का कोई गहरा रहस्य है। गंगा के विशाल मैदानी इलाकों के नीचे 30-35 फीट की अथाह गहराइयों में, जहां सूरज की एक किरण तक नहीं पहुंचती वहां एक गुमनाम दुनिया सांस ले रही है। उस एक वीडियो ने वैज्ञानिकों को लैब से निकालकर बिहार के सुदूर गांवों में पहुंचा दिया। बूझे की नाही में कहानी….गंगा की गहराइयों में मिली ऐसी मछली कि जिसकी आंखें नहीं, शरीर भी पारदर्शी। साल 2024 और 2025 के बीच ठाकरे वाइल्डलाइफ फाउंडेशन के शोधकर्ता अक्षय खांडेकर और उनकी टीम ने बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बालगंगवा गांव और नेपाल के नवलपरासी (त्रिवेणी) इलाके में डेरा डाल दिया। 11 किलोमीटर का यह इलाका उनका सर्च जोन था। मिशन आसान नहीं था। जमीन के नीचे छिपे इस जीव को बाहर लाने का एक ही तरीका था-बोरवेल। वैज्ञानिकों की टीम ने गांवों के 15 से भी ज्यादा हैंडपंपों और बोरवेलों को लगातार 7 दिनों तक चलाया। आखिरकार, दो बोरवेलों से 2,000 लीटर पानी निकालने के बाद जमीन की गहराई से दो जीव बाहर निकले। लेकिन दोनों मर गए। जिंदा जीव की तलाश में वैज्ञानिकों ने फिर से पानी निकालना शुरू किया। करीब 500 लीटर पानी और निकला तब तीसरा जीव मिला…वह जिंदा था। पानी के बर्तन में हल्के गुलाबी रंग की एक पतली सी ईल जैसी मछली तैर रही थी। वैज्ञानिकों ने नाम दिया ‘गंगाचथिस इंडोनेपालिकस’ लैब में जब इस जीव की जांच शुरू हुई तो वैज्ञानिक हैरान रह गए। हाई-रिजॉल्यूशन माइक्रो-CT स्कैन से हड्डियों का 3D एक्स-रे किया गया और DNA टेस्ट (माइटोकॉन्ड्रियल CO1 और RAG1 जीन) चलाए गए। अंधी, शरीर पारदर्शी और पसलियां भी नहीं लाखों सालों तक जमीन के नीचे 10 मीटर की गहराई में बिना धूप के रहने के कारण 40 मिलीमीटर यानी 1.6 इंच लंबी इस मछली का शरीर अनोखे रूप से ढल चुका था… जब इसके DNA की तुलना इसके परिवार की सबसे करीबी प्रजातियों (Chaudhuria caudata और Pillaia indica) से की गई, तो उसमें 20% से 22% से भी ज्यादा का अंतर मिला। जेनेटिक्स के इस बड़े अंतर के कारण वैज्ञानिकों ने इसे अर्थवर्म ईल परिवार का नया वंश माना। वैज्ञानिक बोले- हमारी आंखों से ओझल है एक विशाल जैव-विविधता अब तक भारत में जमीन के नीचे रहने वाली अंधी मछलियों का मुख्य केंद्र केवल दक्षिण भारत के केरलम को माना जाता था। लेकिन इस खोज ने ‘चौधुरिडे’ परिवार के भौगोलिक दायरे को 500 किलोमीटर पश्चिम की ओर खिसका दिया। और यह साबित कर दिया कि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के नीचे भी जीवन का एक अनूठा ‘पाताल लोक’ बसा हुआ है। नीचे की दो ग्राफिक से जानिए, भारत की जमीन के अंदर का रहस्य
Source link
#TikTok #क #वडय #स #खल #039पतल #लक039 #क #रहसयसप #जस #रगत #ह #न #आख #न #पसलय #बहर #म #मल #अजब #मछल #क #कहन

