इंदौर में भागीरथपुरा जैसा बड़ा खतरा! MY समेत 6 बड़े अस्पतालों के पानी में मिले मानव मल में पाए जाने वाले कीटाणु

इंदौर में भागीरथपुरा जैसा बड़ा खतरा! MY समेत 6 बड़े अस्पतालों के पानी में मिले मानव मल में पाए जाने वाले कीटाणु

मध्य प्रदेश के इदौर शहर में स्थित नौ प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर एक विस्तृत पड़ताल की गई, जिसमें छह फेल हो ग…और पढ़ें

Publish Date: Sat, 22 Aug 2026 09:14:49 AM (IST)Updated Date: Sat, 22 Aug 2026 09:15:57 AM (IST)

इंदौर में भागीरथपुरा जैसा बड़ा खतरा! MY समेत 6 बड़े अस्पतालों के पानी में मिले मानव मल में पाए जाने वाले कीटाणु
इंदौर के 6 बड़े अस्पतालों के पानी में मिले खतरनाक ई-कोलाई (AI तस्वीर)

HighLights

  1. सरकारी हॉस्पिटलों के वाटर कूलरों में मिला मानव मल का बैक्टीरिया
  2. MY और चाचा नेहरू समेत 6 बड़े अस्पतालों के पानी में मिले खतरनाक ई-कोलाई
  3. नवजातों से लेकर ICU के मरीजों की जिंदगी खतरे में

डिजिटल डेस्क, इंदौर। मध्य प्रदेश के इदौर शहर में स्थित नौ प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर एक विस्तृत पड़ताल की गई। एनएबीएल (NABL) द्वारा प्रमाणित प्रयोगशाला में कराए गए परीक्षण के नतीजों के अनुसार, छह अस्पतालों के पेयजल नमूनों में मानव व पशुओं के मल-मूत्र में पाए जाने वाले खतरनाक जीवाणु ई-कोलाई और कॉलिफॉर्म मौजूद हैं।

इन अस्पतालों के पानी में पाए गए खतरनाक जीवाणु

एमवाय अस्पताल, पीसी सेठी, चाचा नेहरू (बाल चिकित्सालय), सुपर स्पेशिएलिटी, मेंटल हॉस्पिटल तथा जिला अस्पताल के पीने के पानी में गंभीर स्तर का जैविक प्रदूषण दर्ज हुआ है। ‘संवेदना एनजीओ’ द्वारा संचालित 1000 लीटर क्षमता वाले शोधन तंत्र के बावजूद नमूनों में ई-कोलाई की पुष्टि हुई है। कूलरों के पास गंदगी और आपातकालीन इकाइयों में प्रणालियों का बंद होना प्रमुख समस्या पाई गई।

चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में नवजात बच्चों के इलाज वाले इस संस्थान में वाटर कूलर के आसपास अस्वच्छता पाई गई और नमूनों में संक्रमण फैला पाया गया। वहीं मेंटल हॉस्पिटल व जिला अस्पताल के वाटर कूलर खराब होने के कारण मटकों या लोटों के जरिए असुरक्षित पानी बांटा जा रहा है, जिससे संक्रमण का जोखिम बना हुआ है। पूरे अध्ययन के दौरान केवल एमटीएच, बाणगंगा और एमआरटीबी अस्पताल का पानी ही मानव उपभोग के अनुकूल पाया गया।

यह भी पढ़ें- भागीरथपुरा दूषित पानी कांड: कौन है 36 मौत का जिम्मेदार? 500 से ज्यादा पन्नों की जांच रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश

शरीर के लिए खतरनाक है ई-कोलाई और कॉलिफॉर्म

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ई-कोलाई व कॉलिफॉर्म युक्त पानी से नवजात शिशुओं, आईसीयू में भर्ती मरीजों और ऑपरेशन कराने वाले व्यक्तियों में जानलेवा आंतरिक संक्रमण फैल सकता है। मामले पर एमजीएम मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि अस्पताल संक्रमण नियंत्रण समिति (HICC) द्वारा नियमित अंतराल पर पानी के नमूनों का परीक्षण कराया जाता है। किसी भी प्रकार की कमी सामने आने पर संबंधित अस्पताल प्रबंधकों को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं।

Source link
#इदर #म #भगरथपर #जस #बड #खतर #समत #बड #असपतल #क #पन #म #मल #मनव #मल #म #पए #जन #वल #कटण

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *