केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीएपीएफ अफसरों का कैडर रिव्यू प्रपोजल, डीओपीटी के पास भेज दिया है। सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी, सीआईएसएफ और आईटीबीपी की तरफ से गृह मंत्रालय को मई और जुलाई के बीच कैडर रिव्यू प्रपोजल प्राप्त हुआ था। 27 जुलाई से 3 अगस्त तक सभी बलों का प्रपोजल डीओपीटी को भेजा गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय में सुप्रीम कोर्ट के 23 मई 2025 के फैसले के अनुसार, कैडर का संतुलित ढांचा सुनिश्चित करने के लिए सीएपीएफ में डेपुटेशन के मुद्दे की जांच की गई है। इसमें कानूनी एवं नीतिगत पहलुओं, जैसे कि कानूनी जरूरतों और डीओपीटी की गाइडलाइंस के साथ तालमेल बिठाने की जटिलताओं व प्रक्रियाओं पर विस्तार से विचार किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों सचिवों से मांगा था शपथ पत्र
पदोन्नति में पिछड़ रहे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कैडर अफसरों को 23 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी जीत हासिल हुई थी। तय अवधि में जब इस आदेश का पालन नहीं हुआ तो कैडर अधिकारियों ने दिसंबर 2025 में केंद्रीय गृह सचिव के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल कर दी। सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई को इस मामले से जुड़ी छह अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई हुई। जस्टिस उज्जल भुइयां और अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने इस केस में सख्त रुख अपनाते हुए गृह मंत्रालय और डीओपीटी के सचिव को तीन सप्ताह में शपथ पत्र देने के लिए कहा था। सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि 23 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया था, उसे लागू करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है। उसकी प्रगति रिपोर्ट को लेकर शपथ पत्र दिया जाए। इसमें यह बात भी शामिल रहे कि 23 मई 2025 के बाद से लेकर अब तक लगभग चार दर्जन आईपीएस ‘एसएजी’ (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) लेवल पर बतौर प्रतिनियुक्ति केंद्रीय बलों में कैसे आ गए। इस मामले की अगली सुनवाई दो सितंबर को होनी है।
गृह सचिव ने अपने शपथ पत्र में क्या कहा है?
केंद्रीय गृह सचिव गोविन्द मोहन द्वारा जो अनुपालन शपथ-पत्र दाखिल किया गया है, उसमें लिखा है कि सर्वोच्च न्यायालय के 23.05.2025 को पारित आदेश के आलोक में, शपथकर्ता ने न्यायालय के निर्णय को अक्षरशः और उसकी मूल भावना के अनुरूप लागू करने के लिए कई सक्रिय कदम उठाए हैं। शपथकर्ता यानी गृह सचिव, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार इस प्रक्रिया को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। यह मामला सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (सीएपीएफ) को ‘ऑर्गनाइज्ड ग्रुप ‘ए’ सर्विसेज’ (ओजीएएस) घोषित करने और इसके परिणामस्वरूप कैडर की समीक्षा एवं भर्ती नियमों में संशोधन से जुड़ा है। 26.12.2025 और 03.02.2026 के पत्रों के माध्यम से, सभी केंद्रीय बलों को को निर्देश दिए गए थे कि वे अपने मौजूदा ग्रुप ‘ए’ कैडर की व्यापक समीक्षा करें। उसके बाद गृह मंत्रालय को विस्तृत कैडर समीक्षा प्रस्ताव सौंपा जाए।
गृह मंत्री की सहमति से डीओपीटी को भेजा प्रपोजल
गृह मंत्रालय ने 26.12.2025 के अपने कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से सभी सीएपीएफ को विस्तृत कैडर समीक्षा प्रस्ताव जमा कराने के लिए कहा था। इसके बाद, गृह मंत्रालय ने सभी सीएपीएफ द्वारा कैडर समीक्षा प्रस्तावों को जल्द से जल्द सौंपने के लिए 03.02.2026 को एक रिमाइंडर भी जारी किया। गृह सचिव ने सुप्रीम कोर्ट में अपने शपथ पत्र में कहा कि कैडर रिव्यू का समीक्षा कर ली गई है। उस पर आतंरिक वित्तीय डिवीजन भी राजी हो गई है। गृह मंत्री की सहमति से अब उसे डीओपीटी की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।
सीएपीएफ गृह मंत्रालय को मिला डीओपीटी को भेजा
सीआरपीएफ 20 मई 27 जुलाई
बीएसएफ 9 अप्रैल 3 अगस्त
एसएसबी 16 अप्रैल 28 जुलाई
सीआईएसएफ 6 मई 30 जुलाई
आईटीबीपी 7 जुलाई 3 अगस्त
अभी तक कितने आईपीएस सीएपीएफ में आए
सुप्रीम कोर्ट के 23.05.2025 के फैसले के बाद और 04.08.2026 तक डेपुटेशन पर आए आईपीएस अधिकारियों की सूची का विवरण भी मांगा गया था। गृह सचिव के शपथ पत्र में सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड के स्तर तक डेपुटेशन पर आए आईपीएस अधिकारियों की सूची दी गई है।
पदोन्नति में पिछड़ जाते हैं कैडर अधिकारी
सर्वोच्च अदालत ने 23 मई 2025 को अपने फैसले में कहा था कि आईपीएस अधिकारियों के चलते सीएपीएफ के कैडर अधिकारी, पदोन्नति में पिछड़ जाते हैं। उन्हें नेतृत्व का अवसर नहीं मिल पाता। इन बलों में केवल एनएफएफयू (नॉन फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन) के लिए नहीं, बल्कि सभी कार्यों के लिए ‘ओजीएएस पैटर्न’ लागू किया जाए। शीर्ष अदालत ने सरकार को ‘एसएजी’ (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) स्तर तक के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को अगले दो साल में धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था। इन बलों में आईपीएस के चलते कैडर अधिकारियों की पदोन्नति में ठहराव देखने को मिल रहा है। सर्वोच्च अदालत ने केंद्रीय बलों में आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम करने की बात कही थी। हालांकि इस फैसले के बाद केंद्रीय बलों में डीआईजी के पदों पर आईपीएस की नियुक्ति बढ़ती चली गई।
रिव्यू पिटीशन को डिसमिस कर दिया गया
बता दें कि 28 अक्तूबर 2025 को सर्वोच्च अदालत में कैडर अधिकारियों को ‘सुप्रीम’ जीत मिली थी। सर्वोच्च अदालत द्वारा रिव्यू पिटीशन को डिसमिस किए जाने के बाद केंद्र सरकार को तगड़ा झटका लगा। इससे पहले कैडर अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट में जीत हासिल हुई थी, लेकिन केंद्र सरकार, उस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन में चली गई। पूर्व चीफ जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने खुद को इस केस की सुनवाई से अलग कर लिया था। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश गवई के स्थान पर जस्टिस सूर्यकांत ने जस्टिस उज्जल भुइयां के साथ मिलकर इस मामले की सुनवाई की। सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों को यह डर सता रहा था कि रिव्यू पिटीशन डिसमिस होने के बाद सरकार उन्हें पदोन्नति एवं आर्थिक फायदे देगी या नहीं। वजह, इससे पहले भी कैडर अधिकारी, सर्वोच्च अदालत में जीत हासिल कर चुके थे, लेकिन उन्हें पदोन्नति में फायदा नहीं मिला। इस साल सरकार ने सीएपीएफ बिल भी पास करा लिया था, जिसका कैडर अधिकारियों ने बड़े स्तर पर विरोध किया था।
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