Delhi Police Cyber Fraud Network

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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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Delhi Police Cyber Fraud Network

दिल्ली पुलिस ने देशभर में सायबर फ्रॉड और साइबर म्यूल सिंडिकेट से जुड़े 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर लोगों को निवेश के नाम पर ठगने का आरोप है। आरोपियों को केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब से पकड़ा गया।

जांच में कतर में रह रहे लोगों से इसके संबंध और दुबई में बैठे साइबर अपराधियों से ऑपरेशन में मदद का भी पता चला है।

इनके खिलाफ 34 शिकायतें पुलिस को मिली थीं। इन पर 15.71 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी का आरोप है।

ताजा मामला दिल्ली के पालम कॉलोनी के निवासी की शिकायत के बाद सामने आया। उसने बताया कि उसे निवेश सीखने वाले सोशल मीडिया ग्रुप में जोड़कर फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए निवेश कराया गया।

फर्जी ट्रेडिंग मुनाफा दिखाकर निवेश के लिए भरोसा दिलाया

आरोपियों ने खुद को मार्केट एनालिस्ट और निवेश विशेषज्ञ बताया। उन्होंने फर्जी ट्रेडिंग मुनाफा दिखाकर पीड़ित को निवेश के लिए भरोसा दिलाया।

पीड़ित ने शुरुआत में अलग-अलग बैंक खातों में 4.82 लाख रुपए जमा किए। भरोसा बढ़ाने के लिए उसे थोड़ी रकम निकालने की अनुमति दी गई।

इसके बाद आरोपियों ने आईपीओ अलॉटमेंट के नाम पर उससे 7.81 लाख रुपए और जमा करने को कहा। ठगी का शक होने पर पीड़ित ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की।

इसके बाद दक्षिण-पश्चिम जिले के साइबर पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई।

महाराष्ट्र से शुरू हुई आरोपियों तक पहुंच

जांच टीम ने रकम के लेनदेन और डिजिटल सबूतों की पड़ताल की। इनकी कड़ियां कई राज्यों से जुड़ी मिलीं और जांच पहले महाराष्ट्र पहुंची।

इसके बाद शोएब दिलावर सैयद को नंदुरबार से गिरफ्तार किया गया। उसके मोबाइल की जांच में आपत्तिजनक चैट और डिजिटल सबूत मिले।

पुलिस के मुताबिक, शोएब चार अन्य लोगों के साथ केरल गया था। वहां कथित तौर पर कारोबारी संस्थाएं बनाई गईं और करंट खाते खोले गए।

सूरत से 4 आरोपी गिरफ्तार

सिद्धिकी महमदसिद्दिक मुफीदभाई, शेख रियाजुद्दीन इम्तियाज, हमजा हुमायू और कमालशाह कादरशाह को गुजरात के सूरत से गिरफ्तार किया गया।

अधिकारी ने बताया कि इन लोगों ने शेल (फर्जी) कंपनियां खोलीं और उन्हें चलाया। साइबर अपराध से मिली रकम को आगे भेजने के लिए उन्होंने अपने करंट खाते उपलब्ध कराए।

पुलिस ने केरल से जमालुद्दीन फैसल और मुजामिल थैब को गिरफ्तार किया। पंजाब से सरबजीत सिंह और सोनिया शर्मा को पकड़ा गया।

इन दोनों पर कथित तौर पर म्यूल बैंक खातों को संभालने और साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर वैध दिखाने का आरोप है।

म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग अपराधी ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध रूप से कमाए गए पैसों को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए करते हैं।

कतर और दुबई से कनेक्शन की जांच

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में जमालुद्दीन ने बताया कि कतर में रहने के दौरान वह साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े लोगों के संपर्क में आया था।

एक अन्य संदिग्ध मुख्य समन्वयक सैम उर्फ समीर के दुबई से नेटवर्क चलाने का आरोप है। विदेश में बैठे सैम, रिया और फरहाज की भूमिका की जांच की जा रही है।

पुलिस ने बताया कि एक बैंक कर्मचारी की भूमिका भी अभी जांच के दायरे में है।

फर्जी ऐप पर मुनाफा दिखाकर ठगी

यह नेटवर्क सोशल मीडिया पर चलने वाले निवेश सीखने वाले ग्रुप के जरिए लोगों को निशाना बनाता था। इसके बाद फर्जी ट्रेडिंग ऐप में मुनाफे के फर्जी आंकड़े दिखाए जाते थे।

जब पीड़ित रकम निकालने की कोशिश करते थे, तो उनसे टैक्स, ब्रोकरेज, आईपीओ चार्ज, वेरिफिकेशन फीस या मार्जिन के नाम पर पैसे मांगे जाते थे।

इसके बाद रकम को शेल कंपनियों के करंट खातों के जरिए कई स्तरों पर भेजा जाता था।

34 शिकायतों से जुड़े खाते, 8 फोन बरामद

नेटवर्क से जुड़े खातों का संबंध नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की 34 शिकायतों से मिला। इन शिकायतों में ठगी की रकम 15.71 करोड़ रुपए थी।

अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में दर्ज करीब 2.70 करोड़ रुपए की ठगी से जुड़े 7 मामलों का इन गिरफ्तारियों के बाद खुलासा हुआ है।

पुलिस ने 8 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इनमें चैट, बैंकिंग रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज, खाता खोलने के फॉर्म और लेनदेन की जानकारी मिली है।

पुलिस ने बताया कि केरल के कासरगोड निवासी जमालुद्दीन फैसल का नाम पहले के 2 मामलों में भी सामने आ चुका है। इनमें एक मामला नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट के तहत और दूसरा पीछा करने से जुड़ा है।

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