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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (Delhi-Meerut Expressway) पर ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए एक आधुनिक तकनीकी प्रयोग की शुरुआत की जा रही है। सड़कों का विस्तार करने के बजाय अब वेरिएबल स्पीड लिमिट (Variable Speed Limits – VSL) यानी परिवर्तनशील गति सीमा लागू करने का निर्णय लिया गया है।
इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य व्यस्त समय के दौरान वाहनों की रफ्तार को अचानक थमने से रोकना और यातायात को सुचारू बनाए रखना है।
यह पायलट प्रोजेक्ट कब, कहां और किसके द्वारा संचालित किया जा रहा है?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा वित्तपोषित इस अध्ययन का नाम “ए पायलट स्टडी ऑन इफेक्ट ऑफ वेरिएबल स्पीड लिमिट ऑन ड्राइवर्स बिहेवियर” रखा गया है:
- संचालापक संस्थाएं: इस पायलट स्टडी का संचालन आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर सतीश चंद्र और सीएसआईआर-सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR-CRRI) के डॉ. चालुमूरी रवि शेखर के नेतृत्व में किया जा रहा है।
- शुरुआत की तारीख: इस प्रोजेक्ट को 15 अगस्त के आसपास लॉन्च किया जाना प्रस्तावित है।
- प्रभावित क्षेत्र: यह ट्रायल सराय काले खां से यूपी बॉर्डर के बीच 8.7 किलोमीटर लंबे खिंड पर आयोजित किया जाएगा।

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Meerut-Delhi Expressway
– फोटो : एएनआई
वेरिएबल स्पीड लिमिट (VSL) तकनीक कैसे काम करेगी और यह पारंपरिक स्पीड से कैसे अलग है?
वर्तमान में इस मार्ग पर कारों के लिए 70 किमी प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 50 किमी प्रति घंटा की स्थिर गति सीमा लागू है, भले ही सड़क खाली हो या जाम लगा हो। नई VSL प्रणाली इससे काफी अलग होगी:
- रियल-टाइम बदलाव: यह प्रणाली सड़क पर लगे ट्रैफिक सेंसरों और कैमरों के जरिए गाड़ियों की संख्या और मौसम की स्थिति का विश्लेषण करेगी।
- स्वचालित नियंत्रण: अगर आगे जाम या खराब मौसम का पता चलता है, तो इलेक्ट्रॉनिक साइनबोर्ड स्वचालित रूप से स्पीड लिमिट को कम कर देंगे। स्थिति सामान्य होते ही गति सीमा को फिर से बढ़ा दिया जाएगा।
- वैश्विक सफलता: अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे विकसित देशों में ट्रैफिक कंट्रोल और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए इस तकनीक का उपयोग पहले से ही सफलतापूर्वक किया जा रहा है।

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Traffic Jam at Ghazipur Border, New Delhi on Delhi-Meerut Expressway
– फोटो : PTI
अक्षराधाम के पास ट्रैफिक डेटा के विश्लेषण में कौन-से महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं?
शोधकर्ताओं ने अक्षराधाम प्लाजा के पास कैमरों से जुटाए गए 72 घंटे के ट्रैफिक डेटा का गहन विश्लेषण किया। इस दौरान सामने आए मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:
- वाहनों का अनुपात: एक्सप्रेसवे पर चलने वाले कुल यातायात में 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी कारों की है, जबकि भारी वाहन 4 प्रतिशत से 12 प्रतिशत के बीच हैं।
- ट्रैफिक का समय: दिन चढ़ने के साथ वाहनों की संख्या बढ़ती है और शाम के व्यस्त समय में यह अपने चरम पर पहुंच जाती है। जिससे अक्षराधाम के पास अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है।
दिन के अलग-अलग समय के लिए क्या गति सीमा सुझाई गई है?
रिसर्च के आधार पर शोधकर्ताओं ने गाड़ियों के सहज आवागमन के लिए समय के हिसाब से अलग-अलग गति सीमा तय करने की सिफारिश की है:
- ऑफ-पीक ऑवर्स (रात 12 बजे से सुबह 7 बजे तक):
- कारें: 65 किमी प्रति घंटा
- भारी वाहन: 50 किमी प्रति घंटा
- पीक ऑवर्स (व्यस्त समय):
- कारें: 60 किमी प्रति घंटा
- भारी वाहन: 40 किमी प्रति घंटा

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Delhi Meerut Expressway
– फोटो : PTI
नियमों का पालन कराने के लिए क्या व्यवस्था होगी और इस प्रोजेक्ट का भविष्य क्या है?
इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता और इसके प्रभाव के आकलन के लिए कई चरण तय किए गए हैं:
- अक्षराधाम इंटरचेंज पर डिस्प्ले: अक्षराधाम इंटरचेंज के पास इलेक्ट्रॉनिक VSL बोर्ड लगाए जाएंगे।
- चालान की कार्रवाई: ट्रायल अवधि के दौरान दिल्ली ट्रैफिक पुलिस इन गतिशील गति सीमाओं का उल्लंघन करने वाले चालकों के खिलाफ चालान जारी कर नियम पालन कराएगी।
- मूल्यांकन और समीक्षा: प्रोजेक्ट के लागू होने के 30, 90 और 120 दिनों के बाद इसके प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा। जिसमें वाहनों की औसत गति, जाम का स्तर और ड्राइवरों के व्यवहार का मूल्यांकन होगा।
- भावी संभावनाएं: अगर यह परीक्षण सफल रहता है, तो भारत के अन्य एक्सप्रेसवे पर भी इस किफायती तकनीक को लागू किया जाएगा। जिससे देश में सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को एक नया आयाम मिलेगा।
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