इंदौर की डायमंड कॉलोनी में 500 करोड़ की जमीन को लेकर हुए विवाद और दो पुलिसकर्मियों पर हमले की घटना को लेकर पुलिस के अलावा अब सहकारिता विभाग भी अपने स्तर पर जांच शुरू करने की तैयारी कर चुका है। जिस जमीन को एक फर्म ने खरीदा है, वह डायमंड गृह निर्माण संस्था की जमीन थी। यह संस्था पहले से ही विवादों में रही है। संस्था फिलहाल अस्तित्व में नहीं है, लेकिन सहकारिता विभाग के रिकॉर्ड में अब भी जीवित दर्ज है।
संस्था के परिसमापन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है और न ही संस्था का पंजीयन निरस्त हुआ है। अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि संस्था ने आखिर किस आधार पर फर्म को जमीन बेची। इसके लिए विभाग फर्म के डायरेक्टरों से संबंधित दस्तावेज मांगने के लिए नोटिस भेजेगा।
रिकॉर्ड के अनुसार, इस फर्म के डायरेक्टर प्रतीक संघवी, जयश्री संघवी और दिलीप सिसौदिया उर्फ दीपक मद्दा हैं। दीपक पहले भी जमीनों की खरीद-फरोख्त के मामलों में आरोपी रह चुके हैं। 500 करोड़ की जमीन के मामले में पुलिस ने दीपक से भी घंटों तक पूछताछ की।
2003 में बेची थी जमीन
7 एकड़ से अधिक जमीन वर्ष 2003 में संस्था के कर्ताधर्ताओं ने संयम इंफ्रा फर्म को बेची थी। इस जमीन पर कुछ अतिक्रमण भी है, जिसे हटाने के लिए पहले बब्बू और छब्बू की मदद ली गई थी। अब फिर से कब्जे हटाकर वहां निर्माण कार्य शुरू करने की कवायद की जा रही थी। इसी बात को लेकर 21 जून को विवाद हो गया था। पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
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