इंदौर में इकोनामिक कॉरिडोर, आईटी पार्क और औद्योगिक परियोजनाओं पर काम जारी है। लाखों रोजगार और बड़े निवेश की उम्मीद है, लेकिन निर्माण की धीमी गति चिंता …और पढ़ें

HighLights
- इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर से पांच लाख रोजगार मिलने की उम्मीद।
- आईटी पार्क-3 निर्माण में देरी, रोजगार अवसर प्रभावित।
- आईटी पार्क-4 लगभग तैयार, जल्द कंपनियों को मिलेगा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर को उद्योग, निवेश और रोजगार का नया केंद्र बनाने की दिशा में कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इंदौर-राऊ-पीथमपुर इकोनामिक कॉरिडोर, पीएम मित्रा पार्क और आईटी पार्क परियोजनाओं के जरिए क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि इन परियोजनाओं का निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसके कारण हजारों युवाओं को रोजगार के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, कुछ परियोजनाओं के निर्माण कार्य के चलते आम नागरिकों और वाहन चालकों को भी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
इंदौर-पीथमपुर इकोनामिक कॉरिडोर से जुड़ेगी औद्योगिक ताकत
- करीब 2360 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रहा इंदौर-पीथमपुर इकोनामिक कॉरिडोर प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल है। नैनोद क्षेत्र में इसकी नींव रखी जा चुकी है और पहले चरण में 20 किलोमीटर लंबी तथा 75 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण किया जाएगा। वर्षाकाल के दौरान सड़क निर्माण के लिए होने वाली खुदाई से स्थानीय लोगों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
- कुल 675 मीटर चौड़ाई वाले इस कॉरिडोर में दोनों ओर 300-300 मीटर का विकास क्षेत्र विकसित किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य इंदौर की व्यावसायिक क्षमता और पीथमपुर के औद्योगिक सामर्थ्य के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी स्थापित करना है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और उद्योगों को बेहतर परिवहन सुविधाएं मिलेंगी।
किसानों को विकसित भूमि लौटाने का मॉडल
कॉरिडोर परियोजना में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक विशेष मॉडल अपनाया गया है। इसके तहत अधिग्रहित भूमि का 60 प्रतिशत हिस्सा विकसित कर किसानों को वापस दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे किसानों को भूमि के बढ़े हुए मूल्य का सीधा लाभ मिलेगा और क्षेत्र में योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा मिलेगा।
आईटी पार्क-3 का निर्माण धीमा, रोजगार पर असर
- प्रदेश में आईटी सेक्टर को नई ऊंचाई देने के लिए विकसित किए जा रहे आईटी पार्क-3 का निर्माण कार्य अभी भी पूरा नहीं हो सका है। 529 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह भवन शहर की सबसे ऊंची इमारतों में शामिल होगा। परियोजना के तहत 19 मंजिल, दो बेसमेंट और एक भूतल का निर्माण प्रस्तावित है।
- अधिकारियों के अनुसार अब तक भूतल, दोनों बेसमेंट और 14 मंजिलों का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन कार्य की धीमी गति के कारण परियोजना निर्धारित समय-सीमा में पूरी नहीं हो पाई। 11 लाख वर्गफीट से अधिक क्षेत्र में विकसित हो रहे इस परिसर से प्रदेश में 15 हजार से अधिक आईटी प्रोफेशनल्स को रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही लगभग पांच हजार करोड़ रुपये के निवेश आकर्षित होने का अनुमान है।
आईटी पार्क-4 तैयार, जल्द मिलेगी कंपनियों को लीज
- क्रिस्टल आईटी पार्क और अन्य परियोजनाओं के बाद विकसित आईटी पार्क-4 लगभग तैयार हो चुका है। नौ मंजिला यह आधुनिक आईटी परिसर एक लाख वर्गफीट से अधिक निर्मित क्षेत्र में विकसित किया गया है। 47 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत वाली इस परियोजना में एक भूतल, दो बेसमेंट और आठ मंजिलों का निर्माण किया गया है।
- वर्तमान में परियोजना का करीब 99 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इस पर 27 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। एमपीआईडीसी का लक्ष्य आगामी माह में इस भवन को आईटी कंपनियों के लिए लीज पर उपलब्ध कराना है। अधिकारियों का मानना है कि इससे इंदौर में आईटी उद्योगों के विस्तार को नई गति मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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