30 जून 1857 को इंदौर में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की चेतावनी को कर्नल ड्युडरनेक ने नजरअंदाज कर दिया। 1 जुलाई की सुबह होलकर सेना ने रेसीडेंसी पर तोपो…और पढ़ें

HighLights
- विद्रोह के प्रमुख नेता सआदत खान, वंश गोपाल, हर्षराव सिंह, भागीरथ और अब्दुल समद थे
- होलकर पैदल सैनिकों और नागरिकों ने हमले में 29 यूरोपियन को मार दिया था
- महिदपुर पैदल सेना और भील सैनिकों ने अंग्रेजों का साथ देने से इनकार कर दिया
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। बात साल 1857 की है। 30 जून को एक परिचारक ने कर्नल ड्युडरनेक को सूचित किया कि रेसीडेंसी क्षेत्र में सुबह विद्रोह होने की आशंका है, किंतु ड्युडरनेक ने उस व्यक्ति को दुत्कार के भगा दिया। एक जुलाई की सुबह को विद्रोह भड़क उठा। ड्युडरनेक ने इंदौर रेसीडेंसी कोठी के खजाने की मूल्यवान वस्तुओं को उठाकर महू दुर्ग भेजने के आदेश दिए।
कर्नल ड्युडरनेक अपनी टेबल के पास बैठा कुछ लिख रहा था कि उसे अचानक शोरगुल सुनाई दिया। संदेश वाहक ने सूचना दी कि बाजार में उपद्रव हो गया है। जैसे ही ड्युडरनेक रेसीडेंसी कोठी की सीढ़ियों के पास आया होलकर की सेना ने तोप से तीन गोले दाग दिए। होलकर सेना ने सुबह लगभग 8:40 बजे रेसीडेंसी पर आक्रमण किया।
ये थे विद्रोह के प्रमुख नेता
इतिहास अध्येता सुनील मतकर के अनुसार इस विद्रोह के प्रमुख नेता सआदत खान, वंश गोपाल, हर्षराव सिंह, भागीरथ, अब्दुल समद आदि थे। सआदत खान और वंश गोपाल कर रहे थे। आठ घुड़सवारों के साथ रेसीडेंसी कोठी की ओर बढ़े तथा घोड़े पर ही चिल्लाते हुए बोले ड्युडरनेक आ रहा है तैयार हो जाओ, आगे बढ़ो सारे अंग्रेजों को मार डालो, यह महाराज का आदेश है।
तोपें कब्जे में ले लीं
होलकर राज्य के दरबारी की टुकड़ियों ने तुरंत ही उसका उत्तर दिया। होलकर सेना की टुकड़ियों की दो कंपनियां तीन तोपों से नौ पौंड के गोले दाग रही थी। होलकर राज्य के पैदल सैनिकों और नागरिकों ने मिलकर 29 अंग्रेजों को जिसमें यूरोपियन, यूरेशियन पुरुष, महिला व बच्चे थे उनको मार दिया। सआदत खान को घायल कर कुछ क्षणों के लिए तोपों पर अधिकार कर लिया, किन्तु होलकर सेना ने फिर से अपनी तोपें कब्जे में ले लीं।
पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया
महिदपुर की पैदल सेना ने ड्युडरनेक का आदेश मानने से इनकार कर दिया। भील सैनिकों ने भी अंग्रेजों की ओर से लड़ने के लिए इनकार कर दिया। ड्युडरनेक ने रेसीडेंसी कोठी छोड़ने का निर्णय लिया और महिलाओं व बच्चों को पिछले दरवाजे से बाहर कर दिया। होलकर सैनिकों ने इंदौर, महू, राऊ, तिल्लौर तथा सिमरोल की पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया।
इस समय एक पत्र भेज कर कहा कि इस समय सारा भारत अंग्रेजों का शत्रु है। इसलिए उनके यहां रहना कमजोरी का प्रतीक होगा और इस राज्य का अनिष्ट हो सकता है। इसलिए इसकी यहां रुकने की संभावना नहीं है और ड्युडरनेक सीहोर में एक दिन रुकने के बाद जर्नल वुडबर्न से वार्ता करने के उद्देश्य से होशंगाबाद के लिए रवाना हो गया।
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