Indore Lokayukta Raid: टीचर से अफसर बना था लक्ष्मी नारायण कंडवाल, अब करोड़ों की संपत्ति पर सवाल

Indore Lokayukta Raid: टीचर से अफसर बना था लक्ष्मी नारायण कंडवाल, अब करोड़ों की संपत्ति पर सवाल

इंदौर में लोकायुक्त ने महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के ठिकानों पर छापा मारा। …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 11 Jun 2026 08:58:35 AM (IST)Updated Date: Thu, 11 Jun 2026 09:06:47 AM (IST)

Indore Lokayukta Raid: टीचर से अफसर बना था लक्ष्मी नारायण कंडवाल, अब करोड़ों की संपत्ति पर सवाल
लक्ष्मी नारायण कंडवाल के घर और अन्य ठिकानों पर लोकायुक्त ने की कार्रवाई।

HighLights

  1. आय से अधिक संपत्ति मामले में बुधवार को पांच घंटे तलाशी हुई
  2. 1986 में ग्राम सुनाला में सहायक शिक्षक से करियर शुरुआत की थी
  3. जांच में पत्नी शारदा, पुत्रवधु तनु, हर्षिता के नाम संपत्ति और निवेश मिले

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त की कार्रवाई का सामना कर रहे महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल का सरकारी सेवा का सफर करीब चार दशक पुराना है। वर्ष 1986 में ग्राम सुनाला के माध्यमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू करने वाला कंडवाल बाद में महिला एवं बाल विकास विभाग में विभिन्न पदों पर पदोन्नत होते हुए संयुक्त संचालक बना।

अब लोकायुक्त जांच में उसके और परिजनों के नाम पर करोड़ों रुपये की संपत्ति सामने आने का दावा किया गया है। लोकायुक्त एसपी डॉ. राजेश सहाय के अनुसार, बुधवार को हुई छापामार कार्रवाई के दौरान कंडवाल के निवास और अन्य ठिकानों की करीब पांच घंटे तक तलाशी ली गई।

इस दौरान संपत्तियों, निवेश और बैंक लाकर से संबंधित जानकारी जुटाई गई। जांच में कंडवाल की पत्नी शारदा, पुत्रवधु तनु निनामा और हर्षिता के नाम पर भी संपत्तियों और निवेश से जुड़े दस्तावेज सामने आए हैं, जिनकी पड़ताल की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार कंडवाल के पुत्र अभिषेक और पवन एक सुपर मार्केट का संचालन करते हैं। जांच में इस व्यवसाय में करीब 35.73 लाख रुपये के निवेश की जानकारी मिली है। लोकायुक्त टीम अब परिजनों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों और निवेश के स्रोतों की भी जांच कर रही है।

सहायक शिक्षक से संयुक्त संचालक तक

  • 1986 : ग्राम सुनाला के माध्यमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में पहली नियुक्ति।
  • 1989 : शिक्षा विभाग की नौकरी छोड़कर एलआइसी में सहायक बना।
  • 1996 : एलआइसी से त्यागपत्र देकर रामा (झाबुआ) में परियोजना अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) बना।
  • 2003 : महिला एवं बाल विकास अधिकारी के पद पर पदोन्नति, नीमच में पदस्थापना।
  • 2008 : जिला कार्यक्रम अधिकारी बने, 2013 तक खरगोन में सेवाएं दीं।
  • 2013 : संयुक्त संचालक पद पर पदोन्नति के बाद भोपाल में पदस्थापना।
  • 2013-2018 : रीवा में पदस्थ रहा।
  • 2018-2020 : जबलपुर में संयुक्त संचालक के रूप में कार्य किया।
  • 2021-2024 : उज्जैन संभाग में संयुक्त संचालक रहा।
  • जून 2025 : इंदौर में संयुक्त संचालक के रूप में पदस्थापना हुई।

जांच के प्रमुख बिंदु

  • परिजनों के नाम पर संपत्तियों और निवेश के दस्तावेज मिले।
  • बेटों द्वारा संचालित सुपर मार्केट में 35.73 लाख रुपये का निवेश सामने आया।
  • बैंक लाकर और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जानकारी जुटाई गई।
  • लोकायुक्त टीम संपत्तियों के स्रोत और निवेश के वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।

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