
पाड़ित ने बताया कि विश्वास कायम रखने के लिए आरोपियों ने लेटरहेड, चेक और अन्य दस्तावेज भी दिए। वहीं व्यवसाय से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट, आयकर रिटर्न (आइटीआर), बैंक स्टेटमेंट, आधार कार्ड, पेन कार्ड और फर्म से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने पास रख लिए। इतना ही नहीं सुरक्षा और औपचारिकता का हवाला देकर कई खाली चेकों और दस्तावेजों पर भी हस्ताक्षर करा लिए।जब लंबे समय तक लोन स्वीकृत नहीं हुआ और आरोपियों ने रकम तथा दस्तावेज लौटाने से भी इनकार कर दिया, तब फरियादी ने पुलिस की शरण ली। पुलिस ने आवेदन, बैंक लेन-देन के रिकॉर्ड, चेक और उपलब्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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