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मां नर्मदा के पावन तट पर गुरुवार को ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बना, जिसने पूरे नगर को भक्ति के रंग में रंग दिया। भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की 15वीं वार्षिक रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ पड़ी। “जय जगन्नाथ” के गगनभेदी उद्घोष, शंखनाद, घंटियों की मधुर ध्वनि और पुष्पवर्षा के बीच जब भगवान भव्य रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकले तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं नीलाचल धाम महेश्वर में अवतरित हो गया हो। छह घंटे तक चली इस भव्य रथयात्रा में श्रद्धा, सेवा, संस्कृति और लोकपरंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान विराजे रथ पर
प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर में साध्वी महंत जगतगिरि गुरु मां के पूजन-अर्चन तथा महंत हृदयगिरि महाराज के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को रथ पर विराजित किया गया। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर, महेश्वर विधायक राजकुमार मेव तथा भाजपा मंडल अध्यक्ष विक्रम पटेल ने विधिवत पूजा-अर्चना कर रथयात्रा का शुभारंभ किया। परंपरा के अनुसार अतिथियों ने रथ के आगे झाड़ू लगाकर सेवा, विनम्रता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
रथ की रस्सियां थामने को उमड़े श्रद्धालु
इस वर्ष भी भगवान को रथ पर विराजित करने का सौभाग्य लॉटरी के माध्यम से चयनित श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। जैसे ही रथ मंदिर परिसर से आगे बढ़ा, श्रद्धालुओं में रथ की रस्सियां पकड़ने की होड़ लग गई। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों सहित हजारों श्रद्धालु भगवान के साथ नगर भ्रमण में शामिल हुए। श्रद्धालुओं का विश्वास था कि भगवान के रथ को खींचना सौभाग्य और पुण्य का अवसर है। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर भावविभोर होते रहे।
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महेश्वर में निकली जगन्नाथ यात्रा
– फोटो : अमर उजाला
नगरभर में पुष्पवर्षा, आरती और स्वागत मंच
रथयात्रा का नगर के विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं व्यापारिक संगठनों ने भव्य स्वागत किया। संत रविदास समाज, बीसा नीमा समाज, नर्मदे हर ग्रुप, राम मंदिर समिति, व्यापारी संघ सहित अनेक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर भगवान की आरती उतारी। समाजसेवी आशीष केवट, राम सेन, मनोज पाटीदार, बलाई महासंघ अध्यक्ष मनोज परमार सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता भी यात्रा में शामिल हुए। पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं ने भगवान के जयघोष के साथ वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा।
कथक और आदिवासी लोकनृत्य ने बांधा समां
रथयात्रा का सबसे आकर्षक दृश्य भगवान के रथ के आगे प्रस्तुत की गई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं। कथकाचार्य श्यामरंजन सेनगुप्ता एवं उनकी ‘नृत्यांजलि’ टीम ने भगवान जगन्नाथ को समर्पित भावपूर्ण कथक नृत्य प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं आदिवासी युवक-युवतियों ने पारंपरिक लोकनृत्य और ढोल-थाल की गूंज के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत का मनोहारी प्रदर्शन किया। यात्रा में शामिल युवाओं का उत्साह और लोकधुनों की लय पूरे मार्ग में आकर्षण का केंद्र बनी रही।
नगर की प्रमुख सड़कों से निकली भव्य यात्रा
करीब छह घंटे तक चली रथयात्रा पेशवा मार्ग, बाजार चौक, धान मंडी, सहस्त्रधारा रोड, धामनोद रोड, भवानी माता चौक, जयस्तंभ चौराहा और मगा मार्ग से होते हुए पुनः श्री जगन्नाथ मंदिर पहुँची। पूरे मार्ग पर घरों की छतों, बालकनियों और दुकानों के सामने श्रद्धालुओं की भीड़ भगवान के दर्शन के लिए उमड़ी रही। अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती उतारी और पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। कई परिवार अपने छोटे बच्चों को भगवान के रथ के दर्शन कराने विशेष रूप से मार्ग पर खड़े दिखाई दिए।
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महेश्वर में निकली जगन्नाथ यात्रा
– फोटो : अमर उजाला
महाआरती और महाप्रसादी के साथ हुआ समापन
नगर भ्रमण के बाद भगवान के विग्रह को पुनः मंदिर में विराजित किया गया, जहां विधिवत महाआरती संपन्न हुई। इसके पश्चात मंदिर परिसर में केसरिया भात महाप्रसादी का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर देर शाम तक भक्तों से गुलजार रहा।
प्रशासन और स्वयंसेवकों ने संभाली व्यवस्था
रथयात्रा को शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। एसडीएम पूर्वा मड़लोई और एसडीओपी श्वेता शुक्ला के नेतृत्व में पुलिस बल पूरे मार्ग पर तैनात रहा। बजरंग दल के 100 से अधिक कार्यकर्ताओं सहित अनेक स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते हुए व्यवस्था संभाली। आयोजकों के अनुसार इस वर्ष रथयात्रा में पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की।
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