MP: ममलेश्वर परिसर से हटीं प्राचीन मूर्तियां, सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच पुरातत्व विभाग ने दी जानकारी

MP: ममलेश्वर परिसर से हटीं प्राचीन मूर्तियां, सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच पुरातत्व विभाग ने दी जानकारी

ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर स्थित वृद्धकालेश्वर मंदिर से प्राचीन मूर्तियों को हटाने के मामले में केंद्रीय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, बुरहानपुर के उपमंडल अधिकारी विपुल मैश्राम ने बताया कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों तथा मंदिर क्षेत्र के विकास कार्यों को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा खंडवा कलेक्टर के माध्यम से मूर्तियों को अन्यत्र स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पुरातत्व विभाग को भेजा गया था।

उन्होंने बताया कि यह मामला लंबे समय से विचाराधीन था और इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ था। प्रशासन एवं पुरातत्व विभाग के बीच चर्चा और समन्वय की प्रक्रिया जारी थी। इसी दौरान विभाग को सूचना मिली कि स्थानीय प्रशासन द्वारा वृद्धकालेश्वर मंदिर परिसर से मूर्तियों को हटाने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। कलेक्टर ने कहा कि जैसे ही मुझे जानकारी लगी आज मैं ओमकारेश्वर पहुंचा हूं एवं अपने वरिष्ठ अधिकारियों जानकारी दी है।

पुरातत्व विभाग का कहना है कि हटाई गई सभी मूर्तियों की गिनती, पहचान और तकनीकी परीक्षण किया जा रहा है तथा उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। भविष्य में इन्हें संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा।

MP: ममलेश्वर परिसर से हटीं प्राचीन मूर्तियां, सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच पुरातत्व विभाग ने दी जानकारी


  पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के उपमंडल अधिकारी विपुल मैश्राम मीडिया को जानकारी देते हुए।

ये भी पढ़ें- MP: गुना में 70 लाख का डोडाचूरा जब्त, राजस्थान से एमपी आ रही थी यह खेप; घेराबंदी में फंसा अंतरराज्यीय तस्कर

1997 से सुरक्षित रखी गई थीं दुर्लभ प्रतिमाएं 

उल्लेखनीय है कि ओंकारेश्वर बांध निर्माण के दौरान डूब क्षेत्र में आने वाले अनेक प्राचीन मंदिरों से प्राप्त दुर्लभ प्रतिमाओं को वर्ष 1997 में वृद्धकालेश्वर मंदिर परिसर में सुरक्षित रखा गया था अनेको  मूर्ति मूर्तियां चोरी हो गई थी उसके बाद पुरातत्व विभाग में  वृद्धकालेश्वर  मंदिर बची हई मूर्तियों को सुरक्षित रखदिया था ये मूर्तियां नर्मदा घाटी की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं और वर्षों से पुरातत्व विभाग की निगरानी में थीं।

जिला प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क करने पर किसी भी अधिकारी ने आधिकारिक टिप्पणी नहीं की। प्रशासन की इस चुप्पी ने स्थानीय स्तर पर अनेक सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का मानना है कि पुरातात्विक धरोहरों से जुड़े मामलों में पूर्ण पारदर्शिता आवश्यक है।

Source link
#ममलशवर #परसर #स #हट #परचन #मरतय #सहसथ2028 #क #तयरय #क #बच #परततव #वभग #न #द #जनकर

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *