मध्य प्रदेश में छह महीनों में 520 नई AI और ITMS आधारित बसें जुड़ेंगी। 2027 तक 1100 बसों का लक्ष्य, आधुनिक डिपो, स्मार्ट टिकटिंग और सुरक्षा व्यवस्था हो…और पढ़ें

HighLights
- छह महीनों में प्रदेश में 520 नई बसें जोड़ी जाएंगी।
- 2027 तक बसों की संख्या बढ़ाकर 1100 करने लक्ष्य।
- एआई यात्रियों की मांग के अनुसार बस रूट तय करेगा।
डिजिटल डेस्क। मध्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर अब पूरी तरह से बदलने वाली है। तकनीक और सहूलियत का ऐसा तालमेल होने जा रहा है, जिससे यात्रियों का सफर पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और स्मार्ट हो जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, परिवहन विभाग अगले छह महीनों के भीतर अपने बेड़े में 520 नई बसें जोड़ने जा रहा है। खास बात यह है कि इन बसों को किसी पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए संचालित किया जाएगा। इससे यात्रियों की जरूरत के हिसाब से रियल-टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी।
1100 बसों का है लक्ष्य, बनेंगे 9 विशाल डिपो
- परिवहन विभाग ने वर्ष 2027 तक अपनी बसों की संख्या को बढ़ाकर 1100 तक ले जाने का एक बड़ा खाका तैयार किया है। इसी कड़ी में पहले चरण में 486 ‘पीएम ई-बसें’ और 34 नई इंटरसिटी बसें जल्द ही शुरू की जाएंगी। इतनी बड़ी संख्या में बसों के रखरखाव के लिए 9 नए और आधुनिक डिपो बनाए जा रहे हैं।
यात्रियों की मांग और AI के हिसाब से तय होंगे रूट
- हाल ही में इंदौर में हुए ‘यात्री परिवहन विजन समिट-2026’ में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बसें खाली न दौड़ें, बल्कि वहां चलें जहां उनकी सच में जरूरत है। इसके लिए ट्रांजिट इंटेलिजेंस और एआई का सहारा लिया जाएगा।
एक ही प्लेटफॉर्म पर सारी सुविधा
यात्रियों को अब टिकट के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। ओएनडीसी (ONDC) के तहत एक इंटीग्रेटेड टिकटिंग सिस्टम लाया जा रहा है। इससे यात्रियों को एक ही ऐप या प्लेटफॉर्म पर बस का रूट, उसकी उपलब्धता और किराए की पूरी जानकारी मिल जाएगी। भुगतान के लिए यूपीआई, एनसीएमसी मोबिलिटी कार्ड, डेबिट/क्रेडिट कार्ड और ई-वॉलेट जैसे सभी विकल्प खुले रहेंगे।
सुरक्षा भी, पर्यावरण का भी रखा जाएगा ख्याल
- बड़ी संख्या में ई-बसों के संचालन से राज्य में हर साल लगभग 70 हजार टन कार्बन उत्सर्जन कम होने का अनुमान है, जो पर्यावरण के लिए एक बहुत अच्छी खबर है।
- इसके साथ ही यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बसों में सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन अनिवार्य किए जा रहे हैं। इन बसों को सीधे ‘कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ से जोड़ा जाएगा, जिससे ड्राइवर की हरकतों और बस की लोकेशन की पल-पल निगरानी की जा सकेगी।
घाटे से उबरने के लिए कमाई के नए रास्ते
- अक्सर देखा जाता है कि सरकारी बसें घाटे का सौदा साबित होती हैं। इसे देखते हुए विशेषज्ञों ने किराए के अलावा कमाई के अन्य स्रोत विकसित करने की सलाह दी है।
- वर्ल्ड बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया है कि बस डिपो को केवल पार्किंग तक सीमित न रखकर, वहां रिटेल आउटलेट और लॉजिस्टिक्स जैसी व्यावसायिक गतिविधियां भी शुरू की जानी चाहिए। इससे घाटा भी कम होगा और संचालन अपने पैरों पर खड़ा हो सकेगा।
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