OTT: 7.9 रेटिंग वाली वो खौफनाक क्राइम थ्रिलर, जिसकी कहानी शुरू ही होती है ‘कटे हाथों’ से, Web-series Hindi News


OTT Recommendation: न सुपरकॉप, न धड़ाधड़ एक्शन… फिर भी ये क्राइम थ्रिलर आपके रोंगटे खड़े कर देगी। इसकी आईएमडीबी रेटिंग 7.9 है और लोग इसे एक-दूसरे को रिकमंड कर रहे हैं।

रात की खामोशी, चेन्नई की भीगी-सुनसान सड़कें और खूबसूरत तोहफों के डिब्बों में लिपटे इंसान के कटे हुए हाथ… कुछ ऐसी ही खौफनाक दुनिया में ले जाती है 7.9 रेटिंग वाली यह क्राइम थ्रिलर फिल्म। आम थ्रिलर फिल्मों में पुलिस वाला अक्सर हीरो की तरह हवा में गाड़ियां उड़ाता और धड़ाधड़ डायलॉग मारता नजर आता है। लेकिन इस कहानी का जासूस बिल्कुल अलग है। वह खुद अपनी जिंदगी के अंधेरे से जूझ रहा है। न वह कोई सुपरकॉप है और न ही ऐसा हीरो, जिसे कोई हरा ही न सके।

क्या है इस फिल्म का नाम?

हम बात कर रहे हैं साल 2011 में आई निर्देशक मिस्किन (Mysskin) की चर्चित तमिल क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘युद्धम सेई’ (Yutham Sei) की। फिल्म में अभिनेता चेरन ने डिटेक्टिव जेके का किरदार निभाया है। जेके एक तरफ अपनी लापता बहन को खोज रहा है, तो दूसरी तरफ शहर में हो रहे खौफनाक अपराधों की गुत्थी सुलझाने में जुटा है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, वह एक ऐसी दुनिया में पहुंचता जाता है, जहां हर चीज उतनी सीधी नहीं है, जितनी पहली नजर में दिखाई देती है।

फिल्म को खास क्या बनाता है?

1. जेके इस फिल्म का सबसे अलग पहलू है। वह शांत है, मानसिक तौर पर परेशान है और अपनी निजी जिंदगी की उलझनों से भी जूझ रहा है। वह हर मुसीबत का जवाब मारधाड़ से नहीं देता। उसकी अपनी कमजोरियां हैं और यही चीज उसे बाकी फिल्मों के पुलिसवालों से अलग बनाती है। वह परफेक्ट हीरो नहीं, बल्कि अपनी परेशानियों के बावजूद सच तक पहुंचने की कोशिश करता एक इंसान है।

2. फिल्म में चेन्नई सिर्फ बैकग्राउंड में नजर आने वाला शहर नहीं है। इसकी सुनसान सड़कें, अंधेरी गलियां और लगातार बना रहने वाला सन्नाटा कहानी के रहस्य को और गहरा करते हैं। पूरी फिल्म देखते हुए शहर का माहौल भी आपको कहानी का हिस्सा लगता है।

3. फिल्म की शुरुआत इंसान के कटे हुए हाथ मिलने से होती है और यहीं से रहस्य का सिलसिला शुरू हो जाता है। लेकिन कहानी सिर्फ कातिल को खोजने तक सीमित नहीं रहती। जांच आगे बढ़ने के साथ भ्रष्टाचार, सत्ता और सिस्टम की नाकामी जैसे कई गंभीर सवाल सामने आने लगते हैं। धीरे-धीरे सवाल सिर्फ यह नहीं रह जाता कि अपराधी कौन है, बल्कि यह भी उठता है कि इस पूरी कहानी में सही आखिर कौन है और गलत कौन?

4. ‘युद्धम सेई’ में ऐसा एक्शन नहीं है, जिसमें हीरो अकेले दस लोगों को हवा में उड़ा दे। यहां लड़ाई के सीन ज्यादा जमीन से जुड़े हुए लगते हैं। संकरी गलियों और छोटे कमरों में होने वाली मारधाड़ कच्ची और असली महसूस होती है। फिल्म जरूरत से ज्यादा स्टाइल दिखाने के बजाय कहानी और माहौल पर ध्यान देती है।

5. संगीतकार K का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के सस्पेंस को और बढ़ाता है। म्यूजिक कहानी पर हावी नहीं होता, बल्कि सही वक्त पर रहस्य, बेचैनी और डर का माहौल बनाने में मदद करता है। कई जगह ऐसा लगता है कि बिना कुछ कहे ही बैकग्राउंड स्कोर आपको बता रहा है कि अब कुछ गड़बड़ होने वाली है।

देखें या नहीं?

‘युद्धम सेई’ सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री नहीं है, जिसमें पुलिस कातिल की तलाश करती है और आखिर में केस सुलझ जाता है। फिल्म इससे कहीं आगे जाती है। यह बदले, न्याय और सिस्टम की नाकामी के बीच फंसे एक इंसान की कहानी है।

फिल्म धीरे-धीरे एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है- अगर सिस्टम ही किसी को न्याय नहीं दे पाए, तो इंसान खुद न्याय पाने के लिए कितनी दूर तक जा सकता है?

शायद यही वजह है कि रिलीज के करीब 15 साल बाद भी ‘युद्धम सेई’ को याद किया जाता है। जी5 की यह क्राइम थ्रिलर उन फिल्मों में से है, जो सिर्फ सस्पेंस देकर खत्म नहीं हो जातीं, बल्कि खत्म होने के बाद भी आपके दिमाग में कई सवाल छोड़ जाती हैं।



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