15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र हुआ था, उस दिन श्रावण कृष्ण चतुर्दशी थी।
देशभर में स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाता है, लेकिन उज्जैन के प्राचीन बड़े गणेश मंदिर में इस साल आजादी का पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा।
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दरअसल, मंदिर प्रबंधन का मानना है कि सनातन संस्कृति के सभी पर्वों की तरह स्वतंत्रता दिवस भी तिथि के अनुसार ही मनाया जाना चाहिए। 15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र हुआ था, उस दिन श्रावण कृष्ण चतुर्दशी थी। वैदिक पंचांग में यह तिथि इस साल 11 अगस्त को पड़ रही है, इसीलिए मंदिर में इसी दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा।
मंदिर के पुजारी ज्योतिषाचार्य पं. अक्षत व्यास ने कहा- दीपावली, रक्षाबंधन, दशहरा और होली जैसे सभी पर्व हर साल पंचांग की तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस को अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख से मनाना उचित नहीं है। इसी विचार के आधार पर बड़े गणेश मंदिर में सालों से स्वतंत्रता दिवस तिथि के अनुसार मनाया जा रहा है।
पुजारी बोले- ऐतिहासिक आधार पर बढ़ा रहे परंपरा
बड़े गणेश मंदिर की इस परंपरा का ऐतिहासिक आधार भी है। पं. व्यास ने कहा- 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता का शुभ मुहूर्त हमारे पूर्वज ज्योतिषाचार्य पंडित सूर्यनारायण व्यास ने ही निकाला था। हम उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में हर साल आजादी का पर्व तिथि के अनुसार मनाया जाता है।
तिरंगा यात्रा निकलेगी, शिखर पर फहराया जाएगा ध्वज
मंदिर में 11 अगस्त को धार्मिक और देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सुबह तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद भगवान बड़े गणेश को तिरंगा अर्पित किया जाएगा। राष्ट्रीय ध्वज का पूजन होगा।
महाआरती के बाद ‘वंदे मातरम्’ और देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति होगी। ‘भारत माता की जय’ और ‘जय हिंद’ के घोष के बीच मंदिर के शिखर पर तिरंगा फहराया जाएगा।

स्वतंत्रता दिवस पर भगवान बड़े गणेश को तिरंगा अर्पित किया जाएगा।
कुंडली से तय हुआ था 15 अगस्त का मुहूर्त
बात खत्म होते साल 1946 की है। देश आजाद होने वाला है, अंग्रेज भारत से रुखसत हो रहे हैं, ये लगभग तय हो चुका था। पं. जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री और डॉ. राजेंद्र प्रसाद पहले राष्ट्रपति भी चुन लिए गए थे। लगभग सब कुछ निश्चित हो चुका था, अगस्त 1947 में आखिरी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन भी ब्रिटेन लौट रहे थे। देश बंटवारे की आग में जल रहा था, भारत के दो टुकड़े हो रहे थे।
उन दिनों उज्जैन के क्रांतिकारी, लेखक और ज्योतिषाचार्य पं. सूर्यनारायण व्यास डॉ. राजेंद्र प्रसाद के काफी नजदीकी थे। डॉ. प्रसाद ने अपने भरोसेमंद गोस्वामी गणेश दत्त महाराज के जरिए पं. व्यास को दिल्ली बुलवाया।
उनके सामने सवाल रखा गया कि ज्योतिषीय गणना के मुताबिक किस दिन भारत को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाना चाहिए। अंग्रेजों से दो तारीखें मिली थीं 14 और 15 अगस्त, जिनमें से जिन्ना के नेतृत्व में पाकिस्तान के गठन और भारत की आजादी के लिए एक दिन चुना जाना था।
पंडित व्यास ने आजाद भारत के लिए पंचांग से मुहूर्त देखे। पं. व्यास के बेटे और दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक डॉ. राजशेखर व्यास के मुताबिक, मोहम्मद अली जिन्ना मुहूर्त जैसी बातें नहीं मानते थे, उन्होंने 14 अगस्त का दिन पाकिस्तान के लिए चुना। जबकि पं. व्यास ने उन्हें चेताया था कि 14 अगस्त के दिन ग्रह स्थितियां ठीक नहीं हैं। अगर 14 अगस्त को पाकिस्तान बना तो संभव है कि वो हमेशा अस्थिर रहेगा, क्योंकि उस दिन कुंडली में लग्न यानी कुंडली का पहला स्थान भी अस्थिर वाला था, लेकिन जिन्ना नहीं माने।

भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और उप राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन के साथ पं. सूर्यनारायण व्यास (बीच में)।
14-15 की रात 12 बजे का समय तय किया गया था
डॉ. राजशेखर व्यास के मुताबिक, पं. सूर्यनारायण व्यास की सलाह पर ही डॉ. राजेंद्र प्रसाद और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 14-15 अगस्त की दरमियानी रात 12 बजे का समय भारत की आजादी के लिए तय किया।
कारण था उस दिन भारत की कुंडली में स्थिर वृषभ राशि का लग्न होना, ये लग्न स्थिर माना जाता है। पं. व्यास का तर्क था कि स्थिर लग्न में देश आजाद हुआ तो आजादी और लोकतंत्र दोनों स्थिर रहेंगे।

पं. सूर्यनारायण व्यास ने इस कुंडली को आजादी के मुहूर्त का आधार माना था।
15 अगस्त को रात में फहराया गया तिरंगा
वैसे तो स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने की परंपरा सुबह की है, लेकिन 15 अगस्त 1947 को रात 12 बजे तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले पर तिरंगा फहराया। हालांकि, इतिहास के पन्नों में ये दर्ज नहीं हो सका, लेकिन इसकी सलाह भी पं. व्यास ने ही दी थी।
उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद से कहा था कि अगर हम आधी रात को आजादी का समय ले रहे हैं, तो इसी समय में ध्वजारोहण किया जाए। स्वतंत्रता के औपचारिक कार्यक्रम भले ही सुबह किए जाएं, लेकिन पहला ध्वजारोहण आधी रात में ही होगा। पं. नेहरू ने उनकी बात मानी और आधी रात में लाल किले पर ध्वजारोहण किया।
आधी रात को ही धोया गया संसद भवन, शुद्धिकरण भी हुआ
बकौल राजशेखर व्यास, पं. सूर्यनारायण व्यास ने ही सलाह दी थी कि 15 अगस्त की रात को संसद भवन का शुद्धिकरण किया जाए। इसकी जिम्मेदारी गोस्वामी गिरधारीलाल को दी गई। उन्होंने संसद भवन को धुलवाया और उसका शुद्धिकरण करवाया।

पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल के साथ पं. सूर्यनारायण व्यास की तस्वीर।
1930 में की थी भविष्यवाणी- 1947 में आजाद होगा देश
उज्जैन में 1902 में जन्मे पं. सूर्यनारायण व्यास 1921-1922 से ही आजादी की लड़ाई में सक्रिय हो गए थे। ज्योतिषी भी थे, तो इस पर लेख भी लिखा करते थे। 1930 में आज नाम की पत्रिका के एक लेख में उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि भारत अगस्त 1947 में आजाद हो जाएगा।

1952 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा पं. सूर्यनारायण व्यास को लिखा गया पत्र। जिसमें उन्होंने भविष्यवाणी का जिक्र किया था।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद के राष्ट्रपति बनने की भविष्यवाणी
1952 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का कार्यकाल समाप्त हो रहा था। दूसरा राष्ट्रपति चुना जाना था। तब पं. व्यास ने डॉ. प्रसाद को पहले ही बता दिया था कि फिलहाल आपकी कुंडली संकेत कर रही है कि आप ही देश के राष्ट्रपति चुने जाएंगे। ये बात भी सही साबित हुई और डॉ. राजेंद्र प्रसाद फिर से राष्ट्रपति चुने गए। इस बारे में डॉ. प्रसाद ने पं. व्यास को पत्र भी लिखा था, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि आपने पहले ही बता दिया था।
किताब ‘हू डज नॉट कंसल्ट द स्टार्स’ में भी इसका जिक्र
भारत की आजादी के मुहूर्त की बात एक बार टाइम मैगजीन में भी छपी थी। बात 1980 की है। जब अमेरिका में ये बात उठी कि बड़े राजनेता अपने कामों के लिए एस्ट्रोलॉजी का सहारा भी लेते हैं। तब सर वुडो ब्राइट ने एक किताब लिखी। इसका नाम था- हू डज नॉट कंसल्ट द स्टार्स (who does not consult the stars)।
इस किताब का जिक्र टाइम मैगजीन में भी किया गया। जिसमें उन्होंने लॉर्ड माउंटबेटन के एक किस्से का जिक्र किया था और ये लिखा था कि भारत की आजादी का दिन तय करने में उज्जैन शहर के किसी पंडित का भी योगदान है, उन्होंने सितारे देखकर दिन तय किया है।
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5 सेकेंड में तय की आजादी की तारीख

तारीख- 4 जुलाई 1947। जगह- ब्रिटिश संसद। ब्रिटेन के PM क्लेमेंट एटली ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में खड़े हुए। उनके सामने रखा था- इंडियन इंडिपेंडेंस बिल 1947 का ड्राफ्ट। वो कानून जिसे पारित करके भारत को स्वाधीनता सौंपी जानी थी। PM एटली ने बोलना शुरू किया, ‘भारत के लोगों की इच्छा अब और नहीं टाली जा सकती।’ पढे़ं पूरी खबर…
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