नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नगर निगम के स्वामित्व की धोबीघाट की 6.7 एकड़ जमीन पर मुहर्रम का तीन दिनी मेला शुक्रवार से शुरू हो गया। गुरुवार दोपहर निगमायुक्त ने मेले की अनुमति जारी कर दी थी, लेकिन कुछ घंटे बाद ही वर्चुअली हुई महापौर परिषद की बैठक में इसे निरस्त कर दिया गया।
वक्फ कर्बला इंतजामिया कमेटी ने एमआईसी के अनुमति निरस्त करने के फैसले को चुनौती देते हुए शुक्रवार सुबह हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। शाम करीब चार बजे न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी ने इसकी सुनवाई की और एमआईसी का फैसला निरस्त कर दिया।
कोर्ट ने माना कि एमआईसी की बैठक में जिस तरह से कुछ घंटे पहले दी गई अनुमति निरस्त की गई वह गलत था। कमेटी को भविष्य में मेले की अनुमति के लिए कम से कम दो महीने पहले आवेदन करना होगा और नगर निगम आयोजन तिथि से 25 दिन पहले इस बारे में निर्णय लेगा।
मुहर्रम के अवसर पर दशकों से धोबीघाट मैदान पर मेला लगता रहा है। इस वर्ष इसे लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति चल रही थी। दरअसल चार दिन पहले महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मेले की अनुमति देने से इंकार करते हुए कहा था कि धोबी घाट की जमीन निगम के स्वामित्व की है। जिला कोर्ट ने सितंबर 2024 में ही इस पर मुहर लगा दी है।
कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट है कि सिर्फ 0.02 एकड़ जमीन पर ताजिए ठंडे करने की अनुमति है। बाकी जमीन निगम की है। निगम अब तक मेले की अनुमति देता था, लेकिन इस बार हमने कई कारणों से तय किया कि मेले के लिए जमीन देने सही नहीं है। महापौर के इस बयान के बाद माना जा रहा था कि इस बार मुहर्रम का मेला नहीं लगेगा, लेकिन गुरुवार को निगमायुक्त कार्यालय से मेले की अनुमति जारी हो गई। नगर निगम ने मो.अब्दुल हमीद नियारगर अध्यक्ष वक्फ इंतेजामिया कमेटी के नाम से इसे जारी किया था। मेले के लिए अनुमति जारी होने की सूचना मिलते ही गुरुवार रात एमआइसी की वर्चुअल बैठक बुलवाई गई और मेले की अनुमति निरस्त कर दी गई।
दोपहर से ही शुरू हो गई थी मेले की तैयारी
वक्फ कर्बला इंतजामिया कमेटी की ओर से दो याचिकाएं हाई कोर्ट में प्रस्तुत की गई थीं। इन दोनों की सुनवाई शाम चार बजे बाद हुई। हालांकि इसके पहले शुक्रवार दोपहर से ही धोबीघाट मैदान पर मेला शुरू हो चुका था। जिला वक्फ बोर्ड अध्यक्ष रेहान शेख ने बताया कि हमने नगर निगम के अधिकारियों से अनुरोध किया था कि यह सालभर का आयोजन है, इसे होने दें। इसके बाद उन्होंने अनुमति दे दी जिसके बाद हमने दोपहर से ही मेला शुरू कर दिया।
यह तर्क रखा कोर्ट में
वक्फ कर्बला इंतजामिया कमेटी की ओर से पैरवी करने वाले एडवोकेट ऋषि श्रीवास्तव ने बताया कि हमने कोर्ट को निगम की मंशा से अवगत कराया। हमने कोर्ट को बताया कि गुरुवार दोपहर अनुमति दी गई और उसी रात वापस ले ली गई। कोर्ट ने एमआइसी के फैसले को निरस्त कर दिया। इसके बाद गुरुवार दोपहर दी गई अनुमति स्वत: अस्तित्व में आ गई है।
यह कहा था एमआईसी ने अपने निर्णय में
एमआइसी बैठक में निर्णय लिया गया था कि पिछले साल धोबी घाट पर ताजिए ठंडा करने के साथ मेला लगाने की अनुमति दी गई थी लेकिन आयोजकों को जिन शर्तों पर अनुमति दी गई थी उनका पालन नहीं किया गया। मेले से संबंधित जो राशि जो निगम में जमा कराना थी वह भी जमा नहीं कराई गई। ऐसी स्थिति में धोबी घाट पर सिर्फ ताजिए ठंडा करने की अनुमति दी जाती है। मेला लगाने की जो अनुमति जारी हुई थी उसे निरस्त किया जाता है।
200 साल से ज्यादा पुरानी परंपरा का साक्षी
धोबीघाट मैदान शहर के सबसे पुराने धार्मिक स्थलों में माना जाता है, जहां हर वर्ष मुहर्रम पर ताजिए लाकर सुपुर्द-ए-खाक (दफन) करने की परंपरा निभाई जाती है। यह परंपरा होलकर शासनकाल से चली आ रही मानी जाती है। होलकर काल में इंदौर रियासत की ओर से सरकारी ताजिया निकाला जाता था। यह परंपरा आज भी जारी है और इसे शहर की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल माना जाता है।
पहले शहर और आसपास के गांवों से सैकड़ों ताजिए इसी मैदान में पहुंचते थे। धोबीघाट मैदान मोहर्रम के सबसे बड़े धार्मिक समागम का केंद्र रहा है। ऐतिहासिक रूप से धोबीघाट मैदान के आसपास मोहर्रम के अवसर पर मेला भी लगता था। समय के साथ प्रशासनिक और सुरक्षा कारणों से इसकी व्यवस्था में बदलाव किए गए हैं।
कोर्ट ने माना है निगम का स्वामित्व
धोबीघाट मैदान को लेकर लंबे समय विवाद चला। सितंबर 2024 में जिला कोर्ट ने निगम की अपील स्वीकारते हुए माना था कि 6.7 एकड़ जमीन निगम के स्वामित्व की है। कोर्ट ने फैसले में यह भी कहा था कि सिर्फ 0.02 एकड़ जमीन पर ताजिए ठंडे करने की अनुमति है। बाकी जमीन निगम की है।
ऐसा रहा घटनाक्रम
- 22 जून को महापौर ने बयान जारी कर कहा था कि धोबीघाट मैदान पर इस बार मुहर्रम के अवसर पर मेला नहीं लगेगा। नगर निगम मेला कमेटी को इसकी अनुमति नहीं देगा।
- 25 जून दोपहर निगमायुक्त कार्यालय से मेले की अनुमति जारी कर दी गई। यह अनुमति मो.अब्दुल हमीद नियारगर अध्यक्ष वक्फ इंतेजामिया कमेटी के नाम से जारी की गई थी।
- 25 जून रात महापौर परिषद की बैठक हुई। इसमें दोपहर में दी गई अनुमति को निरस्त करने का निर्णय लिया गया
- 26 जून सुबह हाई कोर्ट में दो याचिकाएं दायर हुईं। शाम चार बजे इनमें सुनवाई हुई। कोर्ट ने 25 जून की रात एमआइसी की बैठक में लिया गया निर्णय निरस्त कर दिया।
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