ओंकारेश्वर-महेश्वर से पैदल नर्मदा जल ले जा रहे उज्जैन, कांवड़ यात्रा में दिखे आस्था के नए रंग

ओंकारेश्वर-महेश्वर से पैदल नर्मदा जल ले जा रहे उज्जैन, कांवड़ यात्रा में दिखे आस्था के नए रंग

इंदौर की तरफ आने वाली सड़कों पर सावन माह में आस्था के नए रंग बिखरे हैं। आंखों पर महंगे सनग्लासेस, कंधे पर सजी-धजी कांवड़ और बोल बम के जयघोष के साथ उठते कदमों से ओंकारेश्वर से उज्जैन के बीच की दूरी पैदल तय हो रही है। कई भक्त महेश्वर से भी उज्जैन जा रहे हैं।


आस्था की कांवड़ उठाने वालों में 12 से 15 साल के बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी हैं। आखिर क्या मिलता है कांवड़ यात्रा से? यह पूछे जाने पर उनका जवाब होता है—बाबा की भक्ति के बाद मन में संतोष रहता है। शरीर में अलग ही ऊर्जा रहती है। हर रोज हजारों कदम पैदल चलने के बावजूद दर्द नहीं ठहरता है।

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