मानुषी छिल्लर बनीं भारतीय प्रस्तुति का चेहरा
समापन समारोह में राष्ट्रमंडल खेलों का ध्वज गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी को सौंपे जाने के बाद पूरा मंच भारत के नाम हो गया। करीब 18 मिनट 27 सेकेंड की प्रस्तुति में मानुषी छिल्लर भारतीय संस्कृति और आधुनिक भारत की पहचान के प्रतीक के रूप में नजर आईं। उनकी मौजूदगी ने अहमदाबाद 2030 के सांस्कृतिक अभियान को वैश्विक मंच पर अलग पहचान दी।
‘वंदे मातरम्’ से शुरू हुई सांस्कृतिक यात्रा
भारतीय प्रस्तुति की शुरुआत ‘भारत, जहां खेल जीवन का हिस्सा हैं’ संदेश के साथ हुई। इसके बाद ‘वंदे मातरम्’, ‘शिव स्तोत्र’ और ‘सुनो गौर से दुनिया वालों’ जैसे गीतों की गूंज पूरे स्टेडियम में सुनाई दी। हजारों भारतीय प्रशंसक तिरंगा लहराते हुए झूम उठे, जबकि विदेशी दर्शक भी भारतीय संगीत और नृत्य की ताल पर थिरकते नजर आए। कार्यक्रम में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की थीम के जरिए भारत ने शांति, एकता और समावेशिता का संदेश दिया। पारंपरिक भारतीय नृत्य, रंग-बिरंगी वेशभूषा और आधुनिक तकनीक के मेल ने प्रस्तुति को यादगार बना दिया।
भारतीय और स्कॉटिश संगीत का अनोखा संगम
समारोह के दौरान भारतीय संगीतकार ऋषभ शर्मा और स्कॉटलैंड के कलाकार रॉस एन्सली ने संयुक्त संगीत प्रस्तुति दी। भारतीय और स्कॉटिश संगीत का यह अनूठा संगम ग्लास्गो से अहमदाबाद तक राष्ट्रमंडल खेलों की यात्रा का प्रतीक बना।
शंकर महादेवन की प्रस्तुति पर झूम उठा स्टेडियम
समापन प्रस्तुति का सबसे आकर्षक क्षण तब आया जब शंकर महादेवन, भूमि त्रिवेदी और ऋषभ शर्मा ने मंच संभाला। भारतीय संगीत की धुनों पर पूरा स्टेडियम तालियां बजाता और झूमता नजर आया। इस प्रस्तुति ने दुनिया को यह संदेश दिया कि अहमदाबाद 2030 केवल खेलों का आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का भी भव्य उत्सव होगा।
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