नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शुक्रवार को इंदौर में ब्रिक्स समूह देशों के कृषि मंत्रियों की बैठक शुरू हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में बैठक का शुभारंभ हुआ।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने ब्रिक्स देशों के मंत्रियों से अपील की कि सभी मिलकर छोटे किसानों को सशक्त बनाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और सतत कृषि विकास के लिए सामूहिक प्रयास करें। ब्रिक्स का यह मंच किसानों के सामने जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव और बाजार की अनिश्चितता का सामूहिक समाधान खोजने का महत्वपूर्ण मंच है।
छोटे और सीमांत किसानों को सशक्त बनाना है
भारत के लगभग 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत किसानों की श्रेणी में आते हैं और इन्हें सशक्त बनाना ही समावेशी विकास की कुंजी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत करोड़ों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जा रहा है, जबकि किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाएं किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही हैं। यदि छोटे किसान मजबूत होते हैं, तो दुनिया की खाद्य सुरक्षा स्वतः सुदृढ़ हो जाएगी।
भारत हमेशा वैश्विक एकता, शांति और सहयोग का पक्षधर रहा है
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संवाद अनुभवों के आदान-प्रदान और नीतिगत सहयोग के माध्यम से वैश्विक कृषि को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा वैश्विक एकता, शांति और सहयोग का पक्षधर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का दृष्टिकोण “युद्ध नहीं शांति, संघर्ष नहीं समन्वय” पर आधारित है, जो वैश्विक कृषि साझेदारी के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बन सकता है। बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर भी उपस्थित थे।
आज जारी होगा ‘इंदौर डिक्लेरेशन’
इंदौर में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के आखिरी दिन शनिवार को ‘इंदौर डिक्लेरेशन‘जारी होगा। इसमें ब्रिक्स समूह देशों के वैश्विक कृषि, खाद्य सुरक्षा और किसानों के अधिकार, तकनीक के उपयोग जैसे मुददे पर अहम निर्णय लिए जाएंगे।
कृषि सिर्फ खाद्य सुरक्षा नहीं करोड़ो लोगों की आजीविका है आधार
मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम संचालित करता है, जिसके माध्यम से बड़ी आबादी को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। भारत में लगभग 43 प्रतिशत आबादी कृषि से जुड़ी है और यह क्षेत्र न केवल खाद्य सुरक्षा बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है। देश में चल रही उन्नत बीज, सिंचाई, तकनीक और किसान सहायता कार्यक्रम से किसानों को व्यापक लाभ मिला है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ाया जाए। रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखना आवश्यक है। मध्य प्रदेश से देशव्यापी “खेत बचाओ अभियान” शुरू किया गया है। इसके माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी और सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं, जिससे प्राकृतिक खेती और जैविक इनपुट्स का उपयोग बढ़ रहा है।
ड्रोन दीदी ग्रामीण भारत में सामाजिक परिवर्तन का है उदाहरण
ब्रिक्स सम्मेलन का शुक्रवार का सत्र कृषि में महिलाओं की भूमिका पर केंद्रीत रहा। केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा कि भारत में कृषि में महिलाओं की भागीदारी प्राचीनकाल से चली आ रही है। इनके बिना खेती कल्पना भी नहीं की जा सकती। आज करोड़ों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों में नेतृत्व कर रही हैं। “ड्रोन दीदी” जैसी पहल ग्रामीण भारत में तकनीकी और सामाजिक परिवर्तन का उदाहरण बनी है। कृषि में नवाचार, स्टार्टअप और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है, जिससे कृषि क्षेत्र अधिक आकर्षक और आधुनिक बन रहा है।
कृषि क्षेत्र में भारत की एक दशक की उपलब्धियां
- 4.5 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई
- 376 मिलिनय टन तक पहुंचा देश का कुल खाद्य उत्पादन
- 118 मिलियन टन पहुंचा गेहूं उत्पादन
- 378 मिलियन टन से अधिक हुआ बागवानी उत्पादन
- 19 मिलियन टन से अधिक हुआ मछली उत्पादन
नोट : यह उपलब्धियां केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने ब्रिक्स बैठक में बताई।
BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक इंदौर में: खाद्य सुरक्षा के साथ किसानों की आय बढ़ाने पर रहेगा फोकस
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