Sanchita Basu Interview : अभिनेत्री संचिता बसु (Sanchita Basu) ने अपनी जिंदगी से जुड़ा एक बेहद भावुक खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि वह एक अनवांटेड चाइल्ड थीं और उनके माता-पिता कुछ परिस्थितियों के कारण उन्हें जन्म नहीं देना चाहते थे. उनकी मां, जो एक नेशनल एथलीट थीं, नियमों और एग्रीमेंट की वजह से पटना की डॉक्टर पद्मश्री शांति राय के क्लिनिक में अबॉर्शन कराने पहुंच गई थीं. इंजेक्शन तक लग चुका था.
इसी दौरान अस्पताल के वेटिंग एरिया में प्रीति जिंटा (Priti Zinta) की फिल्म क्या कहना चल रही थी. फिल्म का डायलॉग. “मेरा बच्चा कोई खराब दांत है क्या, जिसे तोड़कर फेंक दिया जाए?” सुनते ही उनकी मां का मन बदल गया और उन्होंने गर्भपात कराने का फैसला छोड़ दिया. संचिता का कहना है कि एक फिल्म ने उनकी जान बचाई और शायद यही उनकी किस्मत थी कि आज वह उसी फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हैं. उनके जन्मदिन पर आज भी इस फिल्म का गाना जरूर बजाया जाता है.

‘शान्विका’ सिर्फ बदले की नहीं, हिम्मत की कहानी है
वेब सीरीज ‘ठुकरा के मेरा प्यार’ सीजन-2 में अपने किरदार शान्विका को लेकर संचिता कहती हैं कि यह हर उस लड़की की कहानी है, जो मुश्किल हालात में भी हार नहीं मानती. बिना किसी गलती के उसके पिता और पति उससे छिन जाते हैं. समाज के लोग उसके स्वार्थ का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं. ऐसे माहौल में वह अपनी इज्जत और अधिकार के लिए लड़ती है. उनके मुताबिक, शान्विका का किरदार महिलाओं की ताकत और आत्मसम्मान का प्रतीक है.
पहला ब्रेक बना सबसे खास अनुभव
संचिता बताती हैं कि अगर पूरी जिंदगी किसी एक किरदार से अपनी पहचान जोड़नी हो तो वह शान्विका ही होगी. यह उनका पहला बड़ा ब्रेक है और इसी किरदार ने उन्हें अभिनय के कई रंग सीखने का मौका दिया. उन्होंने एक ही रोल में कॉलेज गर्ल, शादीशुदा महिला और फिर मजबूत, आत्मनिर्भर महिला के अलग-अलग रूप निभाए, जो किसी भी नए कलाकार के लिए बड़ी सीख है.

संघर्ष के दिनों वाली संचिता को देना चाहती हैं यह सलाह
रेंट के घर की छत पर रील बनाने से लेकर करोड़ों लोगों तक पहचान बनाने का सफर आसान नहीं था. संचिता कहती हैं कि संघर्ष के दिनों में वह खुद पर बहुत शक करती थीं. आज भी हर नया एपिसोड रिलीज होने से पहले घबराहट होती है. अगर उन्हें अपने पुराने दिनों वाली संचिता को कोई सलाह देनी हो तो वह सिर्फ इतना कहेंगी. “ओवरथिंकिंग मत करो. भगवान और दर्शकों ने यहां तक पहुंचाया है, आगे भी मेहनत का फल मिलेगा.”
फिटनेस का राज, भूखे रहना नहीं बल्कि बैलेंस्ड डाइट
संचिता मानती हैं कि फिट रहने के लिए भूखा रहना जरूरी नहीं है. वह रोज जिम जाती हैं और घर का बना चावल, दाल और सब्जी खाती हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि वह सीमित मात्रा में भोजन करती हैं. दिन में एक बार ही भरपेट खाना खाती हैं, जबकि सुबह चिया सीड्स, ओट्स और प्रोटीन शेक लेती हैं.
रोल मॉडल बनने का दबाव नहीं, जिम्मेदारी महसूस होती है
संचिता खुद को असल जिंदगी में काफी इंट्रोवर्ट बताती हैं. पहले वह अपनी परेशानियां किसी से साझा नहीं करती थीं. लेकिन शान्विका का किरदार निभाने के बाद उनमें बड़ा बदलाव आया. अब उन्हें लगता है कि हर लड़की को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए. जब लड़कियां उन्हें मैसेज करके बताती हैं कि इस किरदार से उन्हें संघर्ष करने की प्रेरणा मिली, तो उन्हें गर्व महसूस होता है. वह कहती हैं कि अभी उनकी उम्र सिर्फ 21 साल है और वह ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी कर रही हैं. वह खुद भी जिंदगी से लगातार सीख रही हैं.

मां को देती हैं अपनी हर सफलता का श्रेय
संचिता के मुताबिक उनकी मां उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं. वह कहती हैं कि अगर उस दिन उनकी मां ने अस्पताल में अपना फैसला नहीं बदला होता, तो आज उनकी जिंदगी ही नहीं होती. इसलिए वह अपनी हर सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी मां को देती हैं. उनके लिए वही फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.


