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मंडीदीप की दो नाबालिग लड़कियां, जो पिता की डांट और भविष्य की चिंताओं से परेशान होकर घर से भाग गई थीं, उन्हें पुलिस ने ढूंढकर उनके घरवालों से मिला दिया है। इन दोनों लड़कियों ने भोपाल के एम्स अस्पताल के सामने बने सुलभ कॉम्प्लेक्स के पास बिना किसी सहारे के डर-डरकर 9-10 दिन बिताए थे। पुलिस के मुताबिक, मंडीदीप के खामखेड़ा गांव के रहने वाले एक शख्स ने 17 जून को अपनी बेटी के गायब होने की रिपोर्ट लिखवाई थी। इसके बाद, वार्ड नंबर 10 के रहने वाले एक अन्य पिता ने 26 जून को अपनी नाबालिग बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। घरवालों को शक था कि किसी अनजान इंसान ने उनकी बच्चियों को बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया है। किडनैपिंग नहीं, गुस्से और डर में छोड़ा था घर मामला गंभीर होने की वजह से मंडीदीप थाना पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस की छानबीन में सामने आया कि बच्चियों को किसी ने अगवा नहीं किया था, बल्कि वे गुस्से और डर में खुद ही घर से निकली थीं। पहली लड़की अपने पिता की डांट से दुखी थी, जबकि दूसरी लड़की इस बात से परेशान थी कि उसके पिता उसे हॉस्टल भेजना चाहते थे। घर से भागकर ये बच्चियां भोपाल के एम्स अस्पताल के सामने सुलभ कॉम्प्लेक्स के आसपास खुले आसमान के नीचे रातें काट रही थीं। एम्स गेट के सामने से पुलिस ने किया बरामद शनिवार को पुलिस ने दोनों लड़कियों को एम्स गेट के सामने से सुरक्षित ढूंढ निकाला और फिर उन्हें उनके माता-पिता के हवाले कर दिया। अपनी बच्चियों को सही-सलामत वापस पाकर परिवार ने राहत की सांस ली है। डॉक्टर की सलाह: बच्चों पर हुक्म न चलाएं, उनसे बात करें इस घटना पर मनोचिकित्सक डॉ. विवेक यादव ने कहा कि आजकल के बच्चे बहुत नाजुक और संवेदनशील होते हैं। ऐसे में माता-पिता को बच्चों पर सिर्फ अपना अधिकार जताने के बजाय उनसे बातचीत करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि घर से भाग जाना किसी समस्या का हल नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि बच्चे के मन में कितना डर और असुरक्षा भरी है। इसलिए माता-पिता को बच्चों के साथ दोस्तों जैसा बर्ताव करना चाहिए।
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