मानसून में खतरे में इंदौर के कई क्षेत्र, खतरनाक मकान कागजों पर दर्ज लेकिन फिर भी हटाए नहीं, कोर्ट स्टे बना बहाना

मानसून में खतरे में इंदौर के कई क्षेत्र, खतरनाक मकान कागजों पर दर्ज लेकिन फिर भी हटाए नहीं, कोर्ट स्टे बना बहाना

शहर के 92 मकान अब भी ऐसे हैं जो अति खतरनाक श्रेणी में होने के बाद भी हटाए नहीं गए हैं। जिम्मेदारों ने वहां बैनर पोस्टर लगाकर लोगों को बता दिया है कि य…और पढ़ें

Publish Date: Sun, 19 Jul 2026 07:01:08 PM (IST)Updated Date: Sun, 19 Jul 2026 07:01:08 PM (IST)

मानसून में खतरे में इंदौर के कई क्षेत्र, खतरनाक मकान कागजों पर दर्ज लेकिन फिर भी हटाए नहीं, कोर्ट स्टे बना बहाना
पुराने इंदौर में भरभराकर गिर सकते हैं जर्जर मकान। (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. पुराने इंदौर में भरभराकर गिर सकते हैं जर्जर मकान
  2. सघन क्षेत्रों में यमदूत बने खड़े हुए हैं 92 जर्जर भवन
  3. कोर्ट और संसाधनों के बहाने टल रही पूरी कार्रवाई

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। हर बार की तरह इस बार भी नगर निगम ने सर्वे का पूरा प्रहसन करने के बाद शहर में खतरनाक मकानों की सूची तैयार कर ली है। इसमें वे मकान भी शामिल हैं जो पिछले कई साल से खतरनाक मकानों की सूची में तो शामिल होते आए हैं। ये मकान सूची में तो शामिल कर लिए जाते हैं लेकिन उन्हें हटाने की कार्रवाई नहीं होती। शहर के 92 मकान अब भी ऐसे हैं जो अति खतरनाक श्रेणी में होने के बाद भी हटाए नहीं गए हैं। जिम्मेदारों ने वहां बैनर पोस्टर लगाकर लोगों को बता दिया है कि ये मकान खतरनाक घोषित हैं।

सघन क्षेत्रों में हादसों का अंदेशा और निगम की सुस्ती

जूनी इंदौर, एमजी रोड और जवाहर मार्ग पर ऐसे मकानों की संख्या अधिक है। सघन आवासीय क्षेत्र होने की वजह से यहां हादसों का अंदेशा भी अधिक रहता है। मकान मालिकों को वर्षों से नोटिस दिए जा रहे हैं लेकिन न मकान हटाने में तेजी दिखाई जा रही है और न कार्रवाई करने में। स्थिति यह है कि पिछले एक साल में एक दर्जन खतरनाक मकानों पर भी कार्रवाई नहीं हुई।

स्वच्छता में नंबर वन, लेकिन जर्जर भवनों पर कार्रवाई में फिसड्डी

स्वच्छता को लेकर देशभर में नंबर वन हमारा इंदौर जर्जर भवनों के खिलाफ कार्रवाई में फिसड्डी है। जर्जर भवनों को हटाने के नाम पर हर साल मानसून के दौरान इक्का-दुक्का कार्रवाई कर कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाती है। हालत कितने गंभीर हैं यह इसी से समझा जा सकता है कि खुद निगम का रिकार्ड बता रहा है कि शहर में 92 जर्जर भवन हैं।

इनमें से ज्यादातर पुराने शहर और मुख्य मार्गों पर हैं। इनके वर्षाकाल में किसी भी दिन भरभराकर गिरने की आशंका है। ऐसा हुआ तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो जाएगा। नगर निगम कभी संसाधन की कमी बताकर तो कभी मामला कोर्ट में लंबित होने के नाम पर कार्रवाई टाल देता है। चौकाने वाली बात तो यह है कि किसी भवन को जर्जर घोषित करने की कोई प्रक्रिया ही निर्धारित नहीं है।

सिर्फ नोटिस जारी कर भूल जाता है निगम

हर साल वर्षाकाल से पहले नगर निगम जर्जर भवनों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा करता है, लेकिन होता कुछ नहीं। ज्यादातर मामलों में कार्रवाई नोटिस से आगे नहीं बढ़ पाती। नोटिस जारी करने के बाद कितने जर्जर मकान हटाए गए, इसका रिकार्ड तक निगम के पास नहीं होता। पिछले एक साल में बमुश्किल एक दर्जन जगह जर्जर मकान हटाने की कार्रवाई हुई। जर्जर भवनों की सूची में शामिल ज्यादातर भवन सघन और पुराने क्षेत्रों में है। ऐसी स्थिति में इन भवनों के भरभराकर गिरने से किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।

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सिर्फ फ्लैक्स लगाकर कर्तव्य की इतिश्री

निगम की सूची में शामिल ज्यादातर जर्जर मकान सालों से यूं ही खड़े हैं। नगर निगम अनंत चतुर्दर्शी के अवसर पर निकलने वाली झांकी से पहले निगम झांकी मार्ग पर पड़ने वाले जर्जर और खतरनाक मकानों के बाहर फ्लैक्स चस्पा कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है। इन फ्लैक्स के माध्यम से लोगों को बताया जाता है कि यह मकान खतरनाक है। इससे दूर रहें। इसके अलावा कभी कोई कार्रवाई नहीं होती।

निगम नियमित कार्रवाई करता है। कुछ जर्जर भवनों के संबंध में न्यायालय में प्रकरण लंबित हैं। कुछ मामलों में कोर्ट ने कार्रवाई पर स्टे दे रखा है। हम प्रयास करते हैं कि जर्जर भवनों की वजह से कोई हादसा न हो। अधिकारियों को भी इस संबंध में निर्देशित किया गया है। जर्जर मकानों को हटाने में तेजी का प्रयास करेंगे।- राजेश उदावत, कालोनी सेल प्रभारी नगर निगम इंदौर

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