यॉर्कर किंग से परे, वकार यूनुस की अनकही दास्तान

यॉर्कर किंग से परे, वकार यूनुस की अनकही दास्तान

31 मई 1999 को नॉर्थम्प्टन में बांग्लादेश के खिलाफ़ वर्ल्ड कप क्रिकेट मैच की शुरुआत में पाकिस्तान के वकार यूनिस गेंदबाज़ी करते हुए.

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अपने शानदार करियर में खतरनाक यॉर्कर्स से विरोधी टीम के बल्लेबाज़ों का सुकून छीनने वाले तेज गेंदबाज़ वकार यूनुस अब बेहद सुकून की जिंदगी जी रहे हैं.

वकार यूनुस का अधिकतर समय अपने परिवार के साथ सिडनी और लाहौर में गुजरता है.

वकार आजकल आप क्या कर रहे हैं? इस सवाल पर उन्होंने बीबीसी हिन्दी को बताया, “जब फुटबॉल वर्ल्ड कप चल रहा हो तो फिर आप खुद सोच सकते हैं कि कोई दूसरी व्यस्तता नहीं हो सकती. मैं इस समय सिडनी से लाहौर आया हूं और इस फुटबॉल फीवर में अपने बेटे अज़ान के साथ रात भर बैठकर वर्ल्ड कप के अहम मैच देख रहा हूं.”

“मुझे फुटबॉल का शौक जरूर है लेकिन मुझसे ज्यादा मेरे बेटे अज़ान को फुटबॉल का जुनून की हद तक शौक है. वह पुर्तगाल और क्रिस्टियानो रोनाल्डो का दीवाना है और जब रोनाल्डो से गोल नहीं होते तो वह परेशान हो जाता है लेकिन जब रोनाल्डो ने उज़्बेकिस्तान के खिलाफ दो गोल किए तो मेरे बेटे की खुशी देखने लायक थी.”

वकार यूनुस कहते हैं, “मेरे बेटे ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर ली है और अब लाहौर में इंटर्नशिप कर रहा है. बड़ी बेटी भी लाहौर में डॉक्टर बनने की राह पर है. छोटी बेटी सिडनी में लॉ की छात्रा है और वकील बनने की राह पर है.”

वकार यूनुस अपने परिवार के साथ

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इमेज कैप्शन, वकार यूनुस अपने परिवार के साथ

वकार यूनुस की पत्नी फरयाल भी डॉक्टर हैं.

वकार यूनुस कहते हैं, “हर माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने और उनका भविष्य बनाने की इच्छा रखते हैं. इसके लिए कोशिश करते हैं. इसलिए मुझे भी खुशी है कि मेरे बच्चे भी उच्च शिक्षा प्राप्त करके एक सार्थक जीवन की ओर बढ़ रहे हैं.”

वकार यूनुस कहते हैं, “लंबे करियर के कारण मैं उस समय अपने परिवार को ज्यादा समय नहीं दे पाया. इसलिए अब मैं अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताकर उस कमी को पूरा करने की कोशिश कर रहा हूं. जहां तक ​दुनियाभर के मुद्दों पर टिप्पणी की बात है, जब भी मुझे कोई काम मिलता है, यह सिलसिला जारी रहता है.”

एक महान नेता से मुलाकात

वकार यूनुस कहते हैं, “क्रिकेट ने मुझे पूरी दुनिया में घुमाया है और मुझे कई महत्वपूर्ण लोगों से मिलने का मौका मिला है. लेकिन जिस व्यक्ति से मिलना मेरे लिए वास्तव में सौभाग्य की बात थी, वह नेल्सन मंडेला थे.”

वह कहते हैं, “साल 1994 में पाकिस्तान क्रिकेट टीम के दक्षिण अफ्रीका दौरे के दौरान हमारी मुलाकात नेल्सन मंडेला से हुई थी. लंबे समय तक मुश्किलों का सामना करने के बाद भी जब वे सामने आए, तब भी वे बहुत विनम्र थे. वे एक महान व्यक्ति और नेता थे और उनसे हुई मुलाकात बहुत यादगार थी, जिसे मैं हमेशा याद रखूंगा.”

उंगली कैसे कट गई?

वकार यूनुस

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इमेज कैप्शन, वकार यूनुस ने एक हादसे में अपनी एक उंगली गंवा दी थी

वकार यूनुस एक टीवी शो में बैठे थे, तभी शो में ब्रेक हुआ और एक हास्यपूर्ण बातचीत के दौरान, वकार यूनुस के बाएं हाथ की चार उंगलियां सभी के लिए चर्चा का विषय बन गईं.

वकार यूनुस के साथी वसीम अकरम, मिस्बाह-उल-हक और वहाब रियाज़ मज़ाक में एक-दूसरे को गेंद फेंक रहे थे और कैच पकड़ रहे थे. जब वकार यूनुस वसीम अकरम की एक गेंद नहीं पकड़ पाए, तो उन्होंने मज़ाक में कहा, “चार उंगलियों से मैं क्या करूं?”

वसीम और मिस्बाह ने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया.

वसीम अकरम ने कहा, “आप यह भी नहीं कह सकते कि मैं पांच मिनट में आया था.”

वकार यूनुस ने तुरंत जवाब दिया, “मैं यह भी नहीं कह सकता कि वह दस मिनट में आया.”

इस मौके पर मिस्बाह-उल-हक ने कहा, “एक बार टीम की बैठक हुई और वकार यूनुस कोच थे. उन्होंने सईद अजमल को गंभीरता से संबोधित करते हुए कहा, ‘अगर तुम मैदान पर जा रहे हो, तो तुम्हें 10 विकेट लेने होंगे.’ और ऐसा कहते हुए उन्होंने दोनों हाथों की उंगलियां दिखाई, जिस पर सईद अजमल ने मासूमियत से कहा, ‘भाई, ये तो सिर्फ नौ हैं.'”

वकार यूनुस अपनी एक उंगली न होने के बारे में बताते हैं.

“हम सभी दोस्त नहर में नहाते थे और नहर पर बने पुल के जाल को पकड़कर ऊपर चढ़ते थे. एक दिन नहर में नहाने के बाद मैं पुल पर चढ़ रहा था कि मेरा पैर फिसल गया. मैंने पुल के जाल को पकड़ने की कोशिश की और इसी दौरान मेरा एक हाथ फिसल गया.”

“मैंने दूसरे हाथ से खुद को गिरने से बचाने की कोशिश की लेकिन मेरी उंगली जाल में फंस गई और कट गई. मैं नीचे गिर गया जिससे मेरी दो पसलियां भी टूट गईं और मुझे सर्जरी करवानी पड़ी.”

वकार यूनुस को आज भी इस बात का अफसोस है कि वह 1987 में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित यूथ वर्ल्ड कप में नहीं खेल पाए थे.

वो बताते हैं, “मैं विकेट ले रहा था और इंजमाम-उल-हक शतक बना रहे थे, जिसके चलते हम दोनों को साहीवाल में युवा टीम के शिविर में बुलाया गया. जब टीम का चयन हुआ, तो यह तय था कि मेरा और इंजमाम-उल-हक का चयन होगा.”

“लेकिन इंजमाम का चयन हो गया और मेरा नहीं. दरअसल सिफारिश काम कर गई और फैसलाबाद से आए एक लड़के का चयन हो गया. वह एक कमिश्नर का बेटा था. वह ऑस्ट्रेलिया गया. हालांकि उसने वहां खेला नहीं, सिर्फ दौरे पर गया था.”

सचिन और वकार ने एक साथ डेब्यू किया

वकार यूनुस

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इमेज कैप्शन, वकार यूनुस ने उसी मैच में डेब्यू किया था जिसमें सचिन तेंदुलकर का डेब्यू हुआ था

16 नवंबर, 1989 को पाकिस्तान और भारत के बीच खेले गए पहले टेस्ट मैच के दूसरे दिन कराची के नेशनल स्टेडियम में जो नजारा था, उसे कोई नहीं भूलेगा. जब एक तरफ गेंद 18 साल के पाकिस्तानी तेज गेंदबाज के हाथों में थी और दूसरी तरफ एक प्रतिभाशाली 16 साल का भारतीय बल्लेबाज क्रीज पर बल्ला थामे खड़ा था.

तेज गेंदबाज वकार यूनुस थे और बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर. यह एक संयोग था कि दोनों का पहला टेस्ट मैच यही था. आने वाले वर्षों में दोनों ने अपनी छाप छोड़ी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि अपने पहले टेस्ट मैच में ही इन दोनों खिलाड़ियों की प्रतिभा दुनिया के सामने आ गई.

उस दिन भारतीय टीम के जो छह विकेट गिरे उनमें से चार विकेट वकार यूनुस ने लिए थे, जिनमें संजय मांजरेकर, मनोज प्रभाकर, सचिन तेंदुलकर और कपिल देव शामिल थे. खास प्रदर्शन की खुशी के साथ उन्होंने उस दिन अपना 18वां जन्मदिन भी मनाया था.

दूसरी ओर सचिन तेंदुलकर ने उस दौरे के माध्यम से यह संदेश दिया कि आने वाले वर्षों में दुनिया एक महान बल्लेबाज को देखेगी.

जीवन एक यात्रा रहा

अगर हम वकार यूनुस के जीवन के शुरुआती हिस्से को देखें तो हम पाते हैं कि वो यात्रा में ही रहे.

वह कहते हैं, “मेरा जीवन वास्तव में एक यात्रा है. मेरे बचपन और जवानी का बड़ा हिस्सा हॉस्टल में बीता. क्रिकेट खेलने के दौरान होटलों में रहना आम था.”

“जीवन ऐसा था कि मुझे अलग-अलग शहरों में समय बिताना पड़ा. कभी मैं शारजाह और दुबई में रहा, कभी अबू धाबी में. पाकिस्तान में रहते हुए लाहौर, वेहारी और बहावलपुर मेरे जीवन का हिस्सा बन गए.”

नुकीली कीलों से पैर में चोट

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इमेज कैप्शन, वकार यूनुस के लिए अपने करियर के शुरुआती दिन मुश्किल भरे रहे

वकार यूनुस की क्रिकेट में रुचि तब बढ़ी जब वह 10वीं कक्षा में दाखिल हुए.

वह कहते हैं, “मुझे अच्छी तरह याद है जब मैंने पहली बार बहावलपुर में स्पाइक्स खरीदे थे. दूसरों को देखकर मुझे भी स्पाइक्स में खेलने की इच्छा हुई और मैंने एक छोटी सी खेल की दुकान से कुछ हाथ से बने देसी स्पाइक्स बनवाए, लेकिन उन्हें पहनते समय मेरे पैरों में चोट लग गई. मेरे पैरों से खून बहने लगा क्योंकि मेरी तेज दौड़ने और गेंदबाजी करने की गति के कारण स्पाइक्स काम नहीं कर पा रहे थे.”

वकार यूनुस कहते हैं, “वो बहुत मुश्किल दिन थे जब हमें रोज़ प्रैक्टिस के लिए वेहारी से बुरेवाला तक बसों से आना-जाना पड़ता था. कभी-कभी पैसे न होने पर कंडक्टर से झगड़ा भी करना पड़ता था. कभी हम बस की छत पर सफर करते थे तो कभी बस के पीछे लटककर.”

“हम दो-तीन बार क्वेटा भी गए और मालगाड़ियों में धक्के खाए, लेकिन हमारा जुनून इतना ज़बरदस्त था कि हम जून और जुलाई की चिलचिलाती गर्मी में भी मैदान पर समय बिताते थे.”

वकार यूनुस पूर्व टेस्ट क्रिकेटरों शफीक अहमद और एहतेशामुद्दीन का नाम बड़े आदर के साथ लेते हैं. उनका कहना है कि शफीक अहमद और एहतेशामुद्दीन उन लोगों में प्रमुख हैं जिनकी वजह उन्होंने अपना करियर बनाया है.

इमरान खान की वजह से मिला काउंटी खेलने का मौका

वकार यूनुस

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इमेज कैप्शन, इमरान खान को वकार यूनुस की गेंदबाजी की रफ्तार ने काफी प्रभावित किया था

वकार यूनुस कहते हैं, “यूबीएल और दिल्ली की टीमों के बीच सुपर विल्स कप का एक मैच था जिसमें सलीम जाफर की खराब फिटनेस के कारण मुझे खेलने का मौका मिला. इमरान खान ने मुझे टीवी पर गेंदबाजी करते देखा और मेरी गति से प्रभावित हुए.”

“उन्हीं की वजह से मुझे शारजाह में होने वाले टूर्नामेंट के लिए टीम में जगह मिली. हालांकि चयनकर्ताओं को लगता था कि मैं अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए तैयार नहीं हूं. लेकिन इमरान खान इस बात पर अड़े थे कि मुझे टीम में होना चाहिए.”

इमरान खान ने वकार यूनुस को काउंटी टीम में लाने में भी अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने ससेक्स के कप्तान पॉल पार्कर और कोच नॉर्मन गिफोर्ड से कहा था कि उनके पास एक बेहद प्रतिभाशाली और अद्वितीय स्ट्राइक बॉलर है और अगर आप लोग उसे साइन कर लें तो अच्छा होगा, वरना अगले साल कोई और उसे ले जाएगा.

लेकिन ससेक्स ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और टोनी डोडिमाडे को अनुबंध दे दिया. जिसके बाद इमरान खान ने सरे के कप्तान इयान ग्रेग से बात की, जो उनके पुराने साथी खिलाड़ी थे.

सरे काउंटी तेज गेंदबाज टोनी ग्रे की फिटनेस को लेकर चिंतित थी. इमरान खान ने वकार यूनुस से कहा था कि अगर सरे काउंटी उन्हें तुरंत पैसे नहीं देती है, तो भी उन्हें वहां जाकर अपनी किस्मत आजमानी चाहिए.

इमरान के कहने पर वकार यूनुस पहली बार द ओवल गए. वहां इयान ग्रेग ने उन्हें दूसरी इलेवन के लिए खेलने का मौका दिया, लेकिन उसके बाद वह काउंटी चैम्पियनशिप और अन्य टूर्नामेंटों में खेलने लगे.

सरे काउंटी ने वकार यूनुस के साथ पहला अनुबंध मात्र 7,000 पाउंड में किया था. उस सीज़न में उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 57 विकेट लिए और अगले सीज़न में उन्होंने 113 विकेट लिए और विजडन के शीर्ष पांच क्रिकेटरों की सूची में शामिल हुए.

‘वकार की गेंदबाजी के लिए हेलमेट जरूरी नहीं…’

वकार यूनुस

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इमेज कैप्शन, वकार यूनुस की गेंदबाजी की सबसे बड़ी पहचान उनकी यॉर्कर्स ही थीं

क्रिकेटर और पत्रकार साइमन ह्यूजेस ने एक बार कहा था कि वकार यूनुस की गेंदबाजी का सामना करने के लिए हेलमेट नहीं पैर की उंगलियों की सुरक्षा के लिए स्टील की कैप जरूरी है. ऐसा वकार यूनुस की खतरनाक स्विंगिंग यॉर्कर गेंदों के कारण कहा गया था.

चाहे काउंटी क्रिकेट हो या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, कई बल्लेबाज वकार यूनुस की खतरनाक स्विंगिंग यॉर्कर का निशाना बने. इनमें वेस्ट इंडीज के ब्रायन लारा भी शामिल रहे. जो उस घटना को कभी नहीं भूल सकते जब वकार यूनुस को लगातार दो चौके लगाने के बाद, वह तेज यॉर्कर पर अपना संतुलन खो बैठे और बोल्ड हो गए.

यह वो दौर था जब वकार यूनुस की गेंदबाजी अपने चरम पर थी. वो बल्लेबाजों के लिए खौफ का प्रतीक थे. उनकी खतरनाक यॉर्कर गेंदों से बल्लेबाजों के पंजे बुरी तरह घायल हो जाते थे. अगर वो चोट से बच जाते तो या तो एलबीडब्ल्यू आउट हो जाते या उनके स्टंप्स हवा में उड़ रहे होते.

कई बल्लेबाज दर्द से कराहते हुए आउट हुए और ड्रेसिंग रूम की ओर बढ़े. इसी कारण वकार यूनुस को दुनिया भर में पैर की उंगलियां कुचलने वाले गेंदबाज के रूप में भी जाना जाता था.

वसीम अकरम को चुनौती

वसीम अकरम और वकार यूनुस

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इमेज कैप्शन, वसीम अकरम और वकार यूनुस ने करीब 15 साल तक पाकिस्तान की तेज गेंदबाजी की अगुवाई की

वसीम अकरम और वकार यूनुस की जोड़ी को क्रिकेट के इतिहास की सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजी जोड़ियों में से एक माना जाता है, जिन्होंने पाकिस्तानी टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

वकार यूनुस कहते हैं, “वसीम भाई मुझसे सीनियर हैं. जब मैं टीम में आया, तब वो सुपरस्टार थे. उस दौर में उन्हें चुनौती देने वाला कोई गेंदबाज नहीं था. उस समय सलीम जाफर, अजीम हाफीज और मोहसिन कमाल जैसे दिग्गज गेंदबाज थे.”

“जब मैंने काउंटी क्रिकेट में विकेट लेना शुरू किया, तब मैं उनसे मुकाबला करने आया था. उनका सम्मान तो था ही, लेकिन मैदान पर चुनौती एक अलग ही बात थी. उस समय वो लंकाशायर के लिए खेल रहे थे. हमारे बीच की प्रतिस्पर्धा से न सिर्फ हम दोनों को फ़ायदा हुआ, बल्कि पाकिस्तानी टीम को भी फायदा हुआ और हमने पाकिस्तान के लिए कई सिरीज जीतीं.”

क्रिकेट की वजह से शादी

वकार यूनुस अपनी पत्नी फरयाल के साथ

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वकार यूनुस की शादी का मामला भी बहुत दिलचस्प है. जब वह लाहौर में एक मैच खेल रहे थे, तब फातिमा जिन्ना मेडिकल कॉलेज के छात्रों का एक समूह मैच देखने के लिए स्टेडियम में आया था.

वह कहते हैं, “मैंने फरयाल को देखा. वह मुझे पसंद आई और मैंने उससे शादी करने का फैसला किया. लेकिन सवाल यह था कि मैं उन्हें पसंद करता था, लेकिन क्या वह भी मुझे पसंद करती थी?”

“उनका परिवार ऑस्ट्रेलिया में रहता था. कुछ मुलाकातों के बाद, मैंने औपचारिक रूप से शादी का प्रस्ताव भेजा, जिसे उनके परिवार ने स्वीकार कर लिया.”

विश्वप्रसिद्ध एथलीट उसैन बोल्ट भी वकार यूनुस के बहुत बड़े प्रशंसक हैं. एक इंटरव्यू में बोल्ट ने कहा कि उन्हें पाकिस्तानी क्रिकेट टीम बहुत पसंद थी और वे वकार यूनुस की तेज गेंदबाजी के दीवाने थे.

वकार यूनुस कहते हैं, “मैं हमेशा से उसेन बोल्ट से मिलना चाहता था, लेकिन मिल नहीं पाया. एक बार मुझे पता चला कि वह क्लब फुटबॉल खेलने सिडनी आए हैं, लेकिन मैं उनसे मिल नहीं पाया. इसी तरह हम वेस्ट इंडीज के दौरे पर थे, लेकिन तब भी मुझे बोल्ट से मिलने का मौका नहीं मिला.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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