सितारों की छांव में सुकून तलाश रहे लोग, स्टार गेजिंग बना प्रोफेशनल्स का नया शौक

सितारों की छांव में सुकून तलाश रहे लोग, स्टार गेजिंग बना प्रोफेशनल्स का नया शौक

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। काम का बढ़ता दबाव, भागदौड़ भरी जिंदगी और लगातार स्क्रीन पर बिताया जाने वाला समय लोगों को मानसिक रूप से थका रहा है। ऐसे में अब बड़ी संख्या में प्रोफेशनल्स खुद के लिए समय निकालकर ऐसे शौक अपना रहे हैं, जिनसे उन्हें मानसिक शांति, नया अनुभव और ज्ञान तीनों मिल सके।

स्टार गेजिंग का शौक बढ़ रहा है, इसमें रात के खुले आसमान में तारों, ग्रहों और आकाशगंगा का अवलोकन करना। डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, फोटोग्राफी के शौकीन लोग स्टार गेजिंग ट्रिप में शामिल हो रहे हैं। इसके लिए वे शहर की रोशनी से दूर ऐसे स्थानों का चयन करते हैं, जहां पाल्यूशन बेहद कम हो और आसमान पूरी तरह साफ दिखाई दे।

स्टार गेजिंग केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विज्ञान और प्रकृति को करीब से समझने का माध्यम भी है। टेलीस्कोप की सहायता से ग्रहों, नक्षत्रों और तारों को देखा जाता है, जबकि खुली आंखों से मिल्की वे जैसी आकाशगंगा का अद्भुत दृश्य लोगों को रोमांचित कर देता है।

हाल ही में इंदौर के एक स्टार गेजिंग समूह के साथ स्पीति घाटी के रंगरिक और लंगजा क्षेत्र में गए प्रतिभागियों ने बताया कि करीब 12,800 से 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित ये स्थान भारत के सबसे बेहतर डार्क स्काई क्षेत्रों में गिने जाते हैं। यहां रात के समय लाइट पाल्यूशन लगभग नहीं होने से हजारों-लाखों तारे स्पष्ट दिखाई देते हैं।

एमजीएम मेडिकल कालेज डॉ. शिखा घनघोरिया ने बताया कि यात्रा के दौरान एस्ट्रोनामर्स ने प्रतिभागियों को ध्रुव तारा, सप्तर्षि मंडल, आर्कटुरस, सीरियस, वेगा जैसे प्रमुख तारों और नक्षत्रों की पहचान कराई। टेलीस्कोप से बृहस्पति और उसके चंद्रमाओं को भी देखा गया। विशेषज्ञों ने पृथ्वी के अक्ष में होने वाले परिवर्तन, ध्रुव तारे की स्थिति और ब्रह्मांड की विशालता से जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी भी दी।

एस्ट्रोफोटोग्राफी का भी बढ़ रहा आकर्षण

स्टार गेजिंग के साथ-साथ एस्ट्रोफोटोग्राफी भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। लंबे एक्सपोजर वाले कैमरों की मदद से फोटोग्राफर रात के आसमान में मौजूद ऐसे दृश्य कैद कर रहे हैं, जिन्हें सामान्य आंखों से देख पाना आसान नहीं होता। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को भी काफी पसंद किया जा रहा है, जिससे युवाओं का रुझान इस गतिविधि की ओर बढ़ा है।

स्टार गेजिंग के लिए यह है प्रमुख स्थान

भारत में लद्दाख का हानले, स्पीति घाटी, रण आफ कच्छ, पैंगोंग त्सो और कर्नाटक का कूर्ग स्टार गेजिंग के लिए प्रमुख स्थानों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में साफ मौसम, कम आबादी और बेहद कम कृत्रिम रोशनी के कारण रात का आसमान अत्यंत स्पष्ट दिखाई देता है। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रकृति के बीच समय बिताने से मानसिक तनाव कम होता है और व्यक्ति खुद को अधिक शांत महसूस करता है। स्टार गेजिंग इसी कारण अब केवल शौक नहीं, बल्कि तनाव से राहत पाने का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है।

घर की जिम्मेदारी भी निभाती हूं

अस्पताल की जिम्मेदारी, मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर की क्लासें, और एक आनकोपैथोलाजिस्ट के रूप में कैंसर बायोप्सी की जांच के साथ ही घर की जिम्मेदारी निभाती हूं। दिमाग ओवरलोड हो जाता है। अपने आप को रिचार्ज करना एक थ्रिल है स्टार गेजिंग और एस्ट्रोफोटोग्राफी। धीरे-धीरे तारों को निहारने की आदत इनका जुनून बन गई। रात 11 बजे हम माइनस 13 डिग्री तापमान में स्टार गैजिंग और एस्ट्रोफोटोग्राफी के लिए निकल पड़े। एस्ट्रोनामर्स ने हमें सबसे पहले ध्रुव तारा दिखाया। हमने रात 11 बजे से 3 बजे तक वहीं समय बिताया। वो चार घंटे मेरी जिंदगी के सबसे शांत और जादुई पल बन गए। – डा. प्रो. शिखा घनघोरिया, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर एवं प्रोफेसर

स्टार गैजिंग का अद्भुत अनुभव प्राप्त हुआ

स्टारगेजिंग मेरी हाबी है, हाल ही में रंगरिक काजा में स्टार गैजिंग का अद्भुत अनुभव प्राप्त हुआ। ऊंचाई पर स्थित इस क्षेत्र मे बेहद कम प्रकाश प्रदूषण रात के आकाश को अत्यंत स्पष्ट बना देता है। वहां मैंने कई तारों के साथ आकाश के सबसे चमकीले तारों को भी देखा। इस दौरान मैंने ध्रुव तारा (Polaris) की पहचान करना सीखा, जो उत्तर दिशा बताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही यह भी जाना कि पृथ्वी की धुरी में होने वाले परिवर्तन के कारण लगभग 12,000 वर्षों बाद वेगा पृथ्वी का अगला उत्तर तारा बनेगा। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में एक बार ऐसे निर्मल आकाश के नीचे तारों को अवश्य देखने जाना चाहिए। – राम गोयल, लॉ स्टूडेंट

लंजा गई जो काजा से 20 किमी की दूरी पर था

स्टार गेजिंग मेरी हाबी है। इस बार मे स्टार गेजिंग के लिए लंजा गई जो काजा से 20 किमी की दूरी पर था। अमावस्या की रात प्रकृति ने अपना सबसे खूबसूरत शो पेश किया। साफ और प्रदूषण-मुक्त आसमान में मिल्की वे यानी आकाशगंगा की दूधिया पट्टी इतनी साफ दिखी कि पर्यटक और स्थानीय लोग मंत्रमुग्ध हो गए। मैंने तस्वीरों में बहुत बार मिल्की वे देखा था, पर अपनी आंखों से देखना बिल्कुल अलग है। लगा जैसे हजारों दीयों को किसी ने आसमान में सजा दिया हो। 20 मिनट तक बस देखती रह गई। शहर में तो 10-15 तारे ही दिखते हैं, यहां पूरा आसमान जगमगा रहा था। – हिया, लॉ स्टूडेंट

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