शहर की इंटरनेशनल घुड़सवार सुदीप्ति हजेला ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों के निशाने पर आ गईं। जालसाजों ने कई दिनों तक उनकी ऑनलाइन रैकी (निगरानी) की और फिर उन्ह…और पढ़ें

HighLights
- शहर की इंटरनेशनल घुड़सवार सुदीप्ति हजेला ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों के निशाने पर आ गईं
- जालसाजों ने कई दिनों तक उनकी ऑनलाइन रैकी (निगरानी) की और फिर उन्हें अपना शिकार बनाया
- ठगों ने ‘ई-मेल स्पूफिंग’ तकनीक का इस्तेमाल कर सुदीप्ति के साथ 1.62 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर की इंटरनेशनल घुड़सवार सुदीप्ति हजेला ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों के निशाने पर आ गईं। जालसाजों ने कई दिनों तक उनकी ऑनलाइन रैकी (निगरानी) की और फिर उन्हें अपना शिकार बनाया। ठगों ने ‘ई-मेल स्पूफिंग’ तकनीक का इस्तेमाल कर सुदीप्ति के साथ 1.62 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
मामले की जानकारी मिलते ही साइबर सेल ने मुस्तैदी दिखाते हुए सुदीप्ति के बैंक खाते से अमेरिका (यूएस) की ‘जेपी मॉर्गन बैंक’ की शाखा में ट्रांसफर किए गए धोखाधड़ी के रुपयों को फ्रीज करवा दिया है। हालांकि, अभी तक स्पूफ ई-मेल भेजने वाले मुख्य आरोपियों की कोई ठोस जानकारी पुलिस के हाथ नहीं लगी है।
बड़े सौदे करने वाले रहते हैं निशाने पर: साइबर एसपी
राज्य साइबर सेल के एसपी सव्यसाची सराफ ने बताया कि ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले शातिर बदमाश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे लोगों की ऑनलाइन रैकी करते हैं जो बड़े सौदे, भारी-भरकम पेमेंट या महंगी चीजें ऑनलाइन खरीदते हैं। ये अपराधी पहले ऐसे लोगों का पूरा डेटा जुटाते हैं, फिर लगातार उनकी ई-मॉनिटरिंग यानी ऑनलाइन रैकी करते हैं। इसके बाद, हूबहू उसी कंपनी की तर्ज पर एक ‘स्पूफ ई-मेल’ तैयार किया जाता है और पीड़ित को नए खाते में पैसा ट्रांसफर करने का झांसा देकर ठगी कर ली जाती है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस केस के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इस तरह से समझें: क्या होता है ‘ई-स्पूफिंग’?
साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक, ई-मेल स्पूफिंग साइबर धोखाधड़ी की एक बेहद शातिर तकनीक है।
- इसमें कोई भी हैकर या ठग, ई-मेल के ‘फॉर्म’ (भेजने वाले) पते को इस तरह बदल देता है कि उसे पहली नजर में देखकर असली और नकली का फर्क पहचानना नामुमकिन हो जाता है।
- उदाहरण के लिए: आपको एक ऐसा ई-मेल मिल सकता है जो दिखने में हूबहू आपके बैंक, किसी सरकारी विभाग या आपके ऑफिस के बॉस के नाम जैसा ही होगा, लेकिन वास्तव में उसे किसी साइबर अपराधी ने भेजा होता है।
इन अपराधों में होता है स्पूफिंग का उपयोग
- फिशिंग (Phishing) के लिए।
- बिजनेस ईमेल कॉम्प्रोमाइज फ्रॉड (BEC) में।
- मालवेयर सॉफ्टवेयर अथवा खतरनाक वायरस भेजने के लिए।
- फर्जी भुगतान या किसी अन्य खाते में पैसे ट्रांसफर करवाने के लिए।
ऐसे रहें सतर्क: साइबर एक्सपर्ट श्वेता की सलाह
यदि आप ऑनलाइन लेन-देन करते हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
- ई-मेल एड्रेस जांचें: यदि आप देश-विदेश से बड़े ट्रांजैक्शन करते हैं या बड़ी कंपनियों/बैंकों से ऑनलाइन जुड़े हैं, तो हर बार ई-मेल भेजने वाले का ई-मेल पता बहुत ध्यान से चेक करें।
- अपडेट्स चेक करें: किसी भी तरह के बदलाव या अपडेट्स को हमेशा क्रॉस-चेक करें।
- सावधान रहें: अचानक पैसे, ओटीपी (OTP) या पासवर्ड मांगने वाले ई-मेल्स से पूरी तरह सावधान रहें।
- संदेहास्पद लिंक्स से बचें: किसी भी संदिग्ध लिंक या अटैचमेंट पर बिना पूरी जांच-पड़ताल किए क्लिक न करें।
- डायरेक्ट कंफर्म करें: थोड़ा भी संदेह होने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था से सीधे बात (डायरेक्ट डायलिंग) कर मामले को कंफर्म करें। ई-मेल डोमेन और एड्रेस की बारीकी से जांच करें और अपने अकाउंट्स में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का उपयोग जरूर करें।
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