इंदौर नगर निगम के 103 करोड़ फर्जी बिल घोटाले का मामला, इंजीनियर और ठेकेदार को जमानत नहीं

इंदौर नगर निगम के 103 करोड़ फर्जी बिल घोटाले का मामला, इंजीनियर और ठेकेदार को जमानत नहीं

इंदौर नगर निगम के 103 करोड़ रुपये के फर्जी बिल घोटाले में इंजीनियर अभय राठौर और ठेकेदार राहुल बड़ेरा को विशेष न्यायालय से राहत नहीं मिली, जमानत खारिज …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 19 Aug 2026 10:14:44 PM (IST)Updated Date: Wed, 19 Aug 2026 10:16:40 PM (IST)

इंदौर नगर निगम के 103 करोड़ फर्जी बिल घोटाले का मामला, इंजीनियर और ठेकेदार को जमानत नहीं
इंदौर नगर निगम के 103 करोड़ फर्जी बिल घोटाले का मामला। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. विशेष न्यायालय ने दोनों आरोपितों की जमानत याचिका खारिज की।
  2. ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।
  3. फर्जी टेंडर और बिल बनाकर 103 करोड़ रुपये हासिल किए।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नगर निगम में फर्जी बिल से हुए 103 करोड़ के घोटाले का मास्टर माइंड इंजीनियर अभय राठौर और ठेकेदार राहुल बड़ेरा जेल मेंं ही रहेंगे। विशेष न्यायालय ने दोनों की जमानत याचिका निरस्त कर दी। आरोपितों ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जमानत मांगी थी।

नगर निगम फर्जी बिल कांड में दोनों आरोपितों की मुख्य भूमिका सामने आने के बाद ईडी ने जून 2024 में आरोपितों के खिलाफ मनी लाण्ड्रिंग एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया था। हाल ही में इस मामले में चालान भी पेश हो चुका है। ईडी ने आरोपितों की संपत्तियां भी अटैच की है। मामले की जांच के बाद ईडी ने जून 2026 के पहले सप्ताह में आरोपितों को गिरफ्तार किया था।

हम जांच में सहयोग कर रहे हैं

  • जमानत याचिका में आरोपितों ने तर्क रखा था कि वे एक साल से जेल में हैं। उन्होंने ईडी की कार्रवाई को एक तरफा बताते हुए कहा था कि हम जांच में सहयोग के लिए तैयार हैं। हम पर लगाए आरोप झूठे हैं। एक सहआरोपित को हाई कोर्ट से गिरफ्तारी से राहत भी मिल चुकी है।
  • ईडी की तरफ से विशेष लोक अभियोजक चंदन ऐरन ने तर्क रखे। उन्होंने कहा कि फर्जी टेंडर, फर्जी बिल, वर्क आर्डर के जरिए बिल बनाकर 103 करोड़ की राशि प्राप्त की गई। आरोप गंभीर हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत आवेदन निरस्त कर दिए।

यह है फर्जी बिल घोटाला

आरोपितों ने नगर निगम में फर्जी टेंडर तैयार किए। कागज पर फर्जी काम बताया गया। जाली वर्क आर्डर और फर्जी बिल भी बनाए। झूठे कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए और निगम से 103 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान प्राप्त कर लिया। जांच में यह बात सामने आई थी कि कई काम कभी किए ही नहीं गए। कुछ काम पहले ही पूरे हो चुके थे। इसके बावजूद उन्हीं कामों के नाम पर भुगतान हुआ।

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