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PTRI में पदस्थ AIG राजेश कुमार मिश्रा के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने भोपाल पहुंची राजस्थान की युवती को न्याय की आस में थाने और दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। युवती के वकील का आरोप है कि विभागीय जांच में शादी का झांसा देकर शारीरिक और आर्थिक शोषण के आरोप सही पाए जाने के बावजूद पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की और उसे घंटों थाने व एडीसीपी कार्यालय में बैठाए रखा। जानकारी के अनुसार युवती शुक्रवार दोपहर अपने वकील के साथ श्यामला हिल्स थाने पहुंची थी। थाना प्रभारी के अवकाश पर होने के कारण उसने आवेदन टीआई गोमेंद्र सिंह को सौंपा। इसके बाद उसे अतिरिक्त डीसीपी कार्यालय भेजा गया, लेकिन वहां भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई। शाम तक इंतजार के बाद युवती को बैरंग लौटना पड़ा। होटल बिलों से साथ रुकने की पुष्टि हुई इस मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि विभागीय जांच में अधिकारी पर लगे आरोपों की पुष्टि होने की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार अधिकारी और युवती जयपुर, भोपाल, दिल्ली तथा मुंबई के होटलों में साथ रुके थे। रिपोर्ट में होटल बिल, सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेजों के आधार पर दोनों के बीच संबंधों का उल्लेख है। साथ ही युवती द्वारा होटल, महंगे कपड़ों और ज्वेलरी पर लाखों रुपये खर्च किए जाने का भी जिक्र किया गया है। पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब विभागीय जांच पहले ही आरोपों की पुष्टि कर चुकी थी, तब एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों हुई? पीड़िता का कहना है कि उसे न्याय की उम्मीद में भोपाल आना पड़ा, लेकिन यहां भी उसे घंटों इंतजार और आश्वासन ही मिला।
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