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बीते कुछ दिनों से पेट्रोल में इथेनॉल मिलाए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो काफ़ी वायरल हो रहे हैं जिनमें वाहन मालिक दावा कर रहे हैं कि इससे इंजन ख़राब हो रहा है और माइलेज पर काफ़ी असर पड़ रहा है.
हालांकि भारत सरकार के तहत आने वाले पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन दावों को ‘मिथक’ क़रार दिया है.
शनिवार को इथेनॉल को लेकर ऑटो उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की जिसमें इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की.
इस बीच सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि डीज़ल में भी ब्लेंडिंग करने की तैयारी है.
गडकरी ने कहा, “भारत अपने बायोफ्यूल ट्रांज़िशन के अगले चरण की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत डीज़ल में 15 प्रतिशत तक आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की योजना है.” आइसोब्यूटेनॉल को भी इथेनॉल से बनाया जाएगा.
दिलचस्प है कि टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्ज़ीक्युटिव वाईस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट अफ़ेयर्स एंड गवर्नेंस) विक्रम गुलाटी ने इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इसे परफ़ॉर्मेंस के मामले में ‘बेहतरीन ईंधन’ बताया जबकि एक दिन पहले ही एक इंटरव्यू में गुलाटी ने कहा था कि “बेशक फ़्यूल एफ़िशिएंसी में कुछ कमी आती है.”
कुछ दिन पहले ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सरकार के ई20 इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का बचाव करते हुए सोशल मीडिया पर फैल रहे दावों को ‘ग़लत जानकारी’ बताया था.
मनी कंट्रोल के अनुसार, मंत्रालय ने उन दावों को ख़ारिज किया जिसमें कहा गया था कि इथेनॉल के उत्पादन में ज़रूरत से ज़्यादा पानी का इस्तेमाल होता है, इथेनॉल के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन को नुक़सान पहुंचता है, बीमा या वारंटी अमान्य हो जाती है या पर्यावरण को नुक़सान पहुंचता है.
शनिवार को जिन तीन एक्सपर्ट्स ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की उनमें विक्रम गुलाटी के अलावा मारुति सुज़ुकी के इंडिया कॉर्पोरेट अफ़ेयर्स सीनियर एग्ज़ीक्युटिव ऑफ़िसर राहुल भारती और एक्सपर्ट वर्तिका शुक्ला शामिल थीं.
एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?

इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर वर्तिका शुक्ला ने कहा, “दुनिया के कई देश, जिनमें कनाडा, अमेरिका, ब्राज़ील, पराग्वे और जर्मनी शामिल हैं, कई वर्षों से अलग-अलग अनुपात में इथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा, “पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग रातों-रात नहीं की गई है. यह एक सुनियोजित और चरणबद्ध तरीक़े से लागू किया गया कार्यक्रम है. 2013 और 2014 में पेट्रोल में क़रीब डेढ़ फ़ीसदी इथेनॉल मिलाया जा रहा था. इस कार्यक्रम का लक्ष्य पेट्रोल में 20 फ़ीसदी इथेनॉल मिश्रण करना था, जिसे दिसंबर 2025 के लिए तय समय-सीमा से पाँच साल पहले पूरा कर लिया गया.”
उन्होंने कहा, “यह वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही उन सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के अनुरूप है, जिनका मक़सद जीवाश्म ईंधन को अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाना और कार्बन उत्सर्जन कम करना है.”
मारुति सुज़ुकी इंडिया के कॉरपोरेट अफ़ेयर्स के सीनियर एग्ज़ीक्यूटिव ऑफ़िसर राहुल भारती ने कहा, “भारत में 2023 से ई20 के अनुरूप सामग्री मानकों को अनिवार्य किया गया है. इससे पहले ई10 मानक लागू था. सवाल उठ रहा है कि अगर ई20 ईंधन का इस्तेमाल उन कारों में किया जाए, जिनका निर्माण और बिक्री 2023 से पहले हुई थी और जिन्हें मुख्य रूप से ई10 के लिए तैयार किया गया था, तो क्या होगा?”
उन्होंने कहा, “हमारे पास पर्याप्त सुरक्षा मानक हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि अगर 2023 से पहले भारत में बनी और बेची गई कारों में ई20 ईंधन का इस्तेमाल किया जाए, तो उनके पुर्ज़ों में घिसावट, जंग लगने या उनकी उम्र पर किसी तरह का नुक़सान नहीं होगा.”
राहुल भारती ने कहा, “एक निर्माता के तौर पर हमने 2023 से पहले प्रचलित ई10 कारों का ई20 ईंधन के साथ सभी मानकों पर परीक्षण किया है और हमें चिंता की कोई वजह नहीं मिली.”
विक्रम गुलाटीः तब और अब

इंजन डैमेज होने और माइलेज कम होने के दावे को लेकर पूछे गए सवाल पर टोयोटा किर्लोस्कर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बीते शुक्रवार को कहा था, “माइलेज में कमी या ईंधन दक्षता घटने को लेकर कई तरह की ग़लतफ़हमियां हैं. हां, ईंधन दक्षता में कुछ कमी ज़रूर आती है, इसमें कोई शक नहीं है. लेकिन यह उतनी बड़ी नहीं है, जितनी बताई जा रही है.”
“ई85 और ई100, यानी 85 फ़ीसदी और 100 फ़ीसदी इथेनॉल वाला ईंधन, सामान्य कारों के लिए नहीं है. यह अलग तरह की तकनीक वाले वाहनों के लिए है, जिन्हें ‘फ़्लेक्स फ़्यूल व्हीकल’ कहा जाता है. ऐसे वाहन इथेनॉल के किसी भी अनुपात वाले मिश्रण पर चल सकते हैं. इसलिए लोगों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. ई20 ही स्टैंडर्ड ईंधन है, जो उपलब्ध रहेगा और यह पुराने व नए, दोनों तरह के वाहनों के अनुकूल है.”
उन्होंने कहा, “एक अप्रैल 2023 के बाद बेचे गए सभी वाहन ई20 के लिए पूरी तरह तैयार हैं. लोगों को यह भरोसा भी होना चाहिए कि 2021 में, ई20 लागू करने से पहले, देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल परीक्षण एजेंसी एआरआईए (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया) के बहुत विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन में साफ़ तौर पर पाया गया कि पुरानी कारों और दोपहिया वाहनों को होने वाले संभावित नुक़सान की आशंका नहीं है.”
“इसका असर बेहद मामूली है. अध्ययन में यह भी सामने आया कि ईंधन दक्षता में केवल 2 से 4 फ़ीसदी तक की कमी आती है, जो कोई बड़ा अंतर नहीं है.”
हालांकि शनिवार को पीआईबी की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में विक्रम गुलाटी ने कहा, “इथेनॉल एक बहुत अच्छा ईंधन है. इसकी ऑक्टेन क्षमता काफ़ी ज़्यादा होती है, इसलिए इसकी ड्राइवेबिलिटी भी बहुत अच्छी होती है. यह कोई नई चीज़ नहीं है. 1900 की शुरुआत में, जब नई ऑटोमोबाइल सड़क पर उतरनी शुरू हुईं, तब इथेनॉल का ही इस्तेमाल किया जाता था.”
“इसका प्रदर्शन इतना अच्छा है कि फ़ॉर्मूला वन रेसिंग कारों में भी इसका इस्तेमाल होता है. परफ़ॉर्मेंस के लिहाज़ से यह ईंधन बेहद अच्छा है. यह एक स्वच्छ ईंधन भी है. यह शून्य-कार्बन ईंधन है, क्योंकि इसे पौधों से तैयार किया जाता है.”
ईरान जंग के दौरान पैदा हुए ईंधन संकट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “2-3 महीने पहले जो कुछ हुआ, उसने हमें झकझोर दिया और यह एक कड़ा संकेत था कि आयातित ऊर्जा पर हमारी निर्भरता हमें कितना असुरक्षित बनाती है. इस मुश्किल दौर में कच्चे तेल की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बन गई थी…इसलिए मेरे हिसाब से पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग से, अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले बहुत सारे असर को ही नहीं कम किया जा सकता है बल्कि उपभोक्ताओं को भी फ़ायदा होगा.”
क्यों उठे सवाल
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भारत सरकार ने 2023 में बीएस6-II नाम की वाहन उत्सर्जन मानक प्रणाली लागू की थी.
इसके तहत वाहन निर्माता कंपनियों को इंजन और उससे जुड़े पुर्ज़ों को ई20 फ्यूल के अनुकूल बनाना अनिवार्य किया गया था.
लेकिन जिन लोगों ने 2023 से पहले गाड़ी ख़रीदी है उनके मन में शंकाएं ज़्यादा हैं.
पिछले साल अगस्त में बीबीसी में प्रकाशित एक स्टोरी के मुताबिक़, पुडुचेरी यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर चुके और टू-व्हीलर गाड़ियों के एक्सपर्ट डॉ. कुमारन ने कहा था कि इथेनॉल के मुताबिक़ पुर्ज़ों को बदलना होगा.
उनके अनुसार, “पेट्रोल पर बेस्ड इंजन सिस्टम और उसके पुर्जे़ उस फ्यूल के साथ ठीक से काम नहीं कर पाते जिसमें ज़्यादा इथेनॉल मिला होता है. इसलिए पुरानी गाड़ियों की पेट्रोल टंकी, गैसकेट और फ़्यूल पाइप जैसी चीज़ों को इथेनॉल के अनुकूल पुर्ज़ों से बदलना ज़रूरी होगा.”
वहीं एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा का कहना था, “इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा होती है, इसलिए ई20 फ्यूल का इस्तेमाल करने पर माइलेज में गिरावट महसूस हो सकती है. हालांकि, इंजन के कुछ हिस्सों में बदलाव और सही ट्यूनिंग के ज़रिए माइलेज की इस कमी को सुधारा जा सकता है.”
‘कांग्रेस के समय शुरू हुआ था कार्यक्रम’
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केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इथेनॉल को लेकर किए जा रहे दावों को अफ़वाह बताया है.
उन्होंने शनिवार को कहा, “पिछले कुछ दिनों में आपने सोशल मीडिया पर बायोफ़्यूल ब्लेंडिंग को लेकर काफ़ी हलचल देखी होगी. मैं आलोचना का स्वागत करता हूं. अगर आपको लगता है कि हमारे काम में कोई कमी है, तो कृपया उसकी ओर ध्यान दिलाइए. हम आपकी बात सुनेंगे, आपके सुझावों को अपने काम में शामिल करेंगे और जहां ज़रूरत होगी, वहां सुधार भी करेंगे.”
“लेकिन उन अफ़वाहों पर भी ग़ौर कीजिए, जो फैलाई जा रही थीं. पहली, कि इथेनॉल के इस्तेमाल से कीड़े लग जाएंगे. दूसरी, कि इथेनॉल के इस्तेमाल से इंजन ख़राब हो जाएगा, उसे नुक़सान पहुंचेगा या फ़्यूल पंप काम करना बंद कर देगा.”
“इथेनॉल के इस्तेमाल का विचार हमने नहीं दिया है. इस पर पिछले 100 सालों से काम हो रहा है. फ़ोर्ड मोटर कंपनी के मालिक हेनरी फ़ोर्ड अपने समय में बायोफ़्यूल, मिट्टी के तेल और जीवाश्म ईंधन से चलने वाली कारें चलाते थे.”
उन्होंने कहा कि भारत में सबसे पहले यह योजना कांग्रेस सरकार ने बनाई थी.
उनके अनुसार, “मुझे 2006 से 2008 के बीच ब्राज़ील में राजदूत के तौर पर अपना कार्यकाल याद है. उस समय शरद पवार कृषि मंत्री थे. हमने 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5 फ़ीसदी बायोफ़्यूल ब्लेंडिंग का लक्ष्य तय किया था, लेकिन हम 1.4 फ़ीसदी पर ही रुक गए थे.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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