ब्रिक्स सम्मेलन में जर्मनी, इथियोपिया, इंडोनेशिया सहित 20 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। उनके लिए सुबह हेरिटेज वॉक आयोजित की गई। पहले यह …और पढ़ें

HighLights
- इंदौर में चल रहे पांच दिवसीय ब्रिक्स कृषि सम्मेलन का बुधवार को दूसरा दिन है
- सम्मेलन में ब्रिक्स देशों समेत करीब 20 देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं
- सुबह प्रतिनिधि राजवाड़ा पहुंचे, जहां उन्होंने हेरिटेज वॉक में हिस्सा लिया
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर में चल रहे पांच दिवसीय ब्रिक्स कृषि सम्मेलन का बुधवार को दूसरा दिन है। सम्मेलन में ब्रिक्स देशों समेत करीब 20 देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। बुधवार सुबह प्रतिनिधि राजवाड़ा पहुंचे, जहां उन्होंने हेरिटेज वॉक में हिस्सा लिया। इसके बाद ग्रामीण हाट बाजार का भ्रमण भी किया।
इंदौर में चल रहे ब्रिक्स कृषि सम्मेलन में भाग लेने आए अलग-अलग देशों से आए प्रतिनिधियों और कृषि विशेषज्ञों ने बुधवार सुबह राजवाड़ा का भ्रमण किया। मेहमानों के लिए राजवाड़ा पैलेस में पुराने समय में लगने वाले दरबार की तरह हरकारों की गूंज सुनाई दी और शास्त्रीय संगीत की स्वर-लहरियां गूंजीं।

राजवाड़ा पहुंचे प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया। (नईदुनिया प्रतिनिधि)
ब्रिक्स सम्मेलन में जर्मनी, इथियोपिया, इंडोनेशिया सहित 20 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। उनके लिए सुबह हेरिटेज वॉक आयोजित की गई। पहले यह वॉक बोलिया सरकार छतरी से होना थी, लेकिन उसके बजाय मेहमान साढ़े छह बजे सीधे राजवाड़ा पहुंचे। यहां उनके लिए गोल मेज लगाई गई थी।
यहां राजवाड़ा में जब दरबार लगता था, तब दूसरे राज्यों के राजाओं को किस तरह हरकारा देकर सम्मानित किया जाता था, इसकी प्रस्तुति भी दी गई। इसके बाद राजवाड़ा पर संगीत और नृत्य की प्रस्तुति भी कलाकारों ने दी। इसके बाद मेहमान गोपाल मंदिर पहुंचे और पहली मंजिल पर लकड़ी के नक्काशीदार भवनों को निहारा। मेहमानों के लिए इंदौरी नाश्ते की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने पोहे, जलेबी के साथ मेहमानों ने चाय-कॉफी का लुत्फ भी लिया।
राजवाड़ा पहुंचे प्रतिनिधियों ने विभिन्न स्टॉलों पर रखे कृषि उत्पादों को भी देखा। (नईदुनिया प्रतिनिधि)
सम्मेलन के पहले दिन मंगलवार को भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। इसमें कृषि व्यापार बढ़ाने, तकनीकी सहयोग मजबूत करने और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। दोनों देशों ने जलवायु अनुकूल खेती और कृषि अनुसंधान में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। आयोजन 9 से 13 जून तक इंदौर में हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सम्मेलन से मध्यप्रदेश को कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक पहचान मिलेगी। साथ ही निवेश और तकनीकी सहयोग की नई संभावनाएं भी खुलेंगी।
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